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तनहाइयाँ आशना है मेरी दुनिया से कभ हमारा याराना था फुसूँ का मरसिम है ना कोई रंजिश है ना कोई तर्क ना तकरार ज़बान पर शक्कर का है ज़ायक़ा चेहरे पे मुस्कान लिए दिल में रौनक़ें है लगी पहले जब वो अजनबी थी बड़ी दूर दूर से घूरा करती थी अब यह हमसफ़र है हमारी क़दम क़दम साथ रखा करती है ना कोई ख़्वाहिश उसकी ना उसकी कोई पहचान उसकी नज़दीकियों में फ़ासले की ख़ुशबू हम साक़ी हैं उसके वो आधा भरा हुआ जाम वो ना थी तो बेफ़्ज़ूल सा शोर था छाया चारों और बड़ी कशमक़स में थी ज़िंदगी जो मन में था उसे अल्फ़ाज़ कहाँ बयान करते थे जो सुन रहे थे वो ज़स्बात सांगदिल ना हुआ करते थे लोगों की भीड़ में यादों की शाही का रंग उड़ रहा था भूले बीसरे क़िस्सों को बयान करने की ख़लिश पे आँखो की बारिश का पानी पड़ रहा था किसी को क्या इल्ज़ाम दे ख़ुद से ही थी ख़ुद को शिकायतें उन हालातों के हम मुलज़िम थे और बीमार भी अब दूर तक फैला है सुकून का सन्नाटा घंटों ख़ुद से ख़ुद के दिल ऐ हाल बयान करते हैं वो दिन रात सुनती है बड़े आराम से हमारे फिखरों पे तहाके लगा के हँसती है वो हमराह है हमारी वो हमराज़ भी अब मरहम है ज़िंदगी खवाबों के परिंदे के पर लगाए ख़ूब देर तक उड़ती है
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Jan 27, 2019
Jan 27, 2019 at 5:48 PM UTC
मैं और मेरी तनहाइयाँ
तनहाइयाँ आशना है मेरी दुनिया से कभ हमारा याराना था फुसूँ का मरसिम है ना कोई रंजिश है ना कोई तर्क ना तकरार ज़बान पर शक्कर का है ज़ायक़ा चेहरे पे मुस्कान लिए दिल में रौनक़ें है लगी पहले जब वो अजनबी थी बड़ी दूर दूर से घूरा करती थी अब यह हमसफ़र है हमारी क़दम क़दम साथ रखा करती है ना कोई ख़्वाहिश उसकी ना उसकी कोई पहचान उसकी नज़दीकियों में फ़ासले की ख़ुशबू हम साक़ी हैं उसके वो आधा भरा हुआ जाम वो ना थी तो बेफ़्ज़ूल सा शोर था छाया चारों और बड़ी कशमक़स में थी ज़िंदगी जो मन में था उसे अल्फ़ाज़ कहाँ बयान करते थे जो सुन रहे थे वो ज़स्बात सांगदिल ना हुआ करते थे लोगों की भीड़ में यादों की शाही का रंग उड़ रहा था भूले बीसरे क़िस्सों को बयान करने की ख़लिश पे आँखो की बारिश का पानी पड़ रहा था किसी को क्या इल्ज़ाम दे ख़ुद से ही थी ख़ुद को शिकायतें उन हालातों के हम मुलज़िम थे और बीमार भी अब दूर तक फैला है सुकून का सन्नाटा घंटों ख़ुद से ख़ुद के दिल ऐ हाल बयान करते हैं वो दिन रात सुनती है बड़े आराम से हमारे फिखरों पे तहाके लगा के हँसती है वो हमराह है हमारी वो हमराज़ भी अब मरहम है ज़िंदगी खवाबों के परिंदे के पर लगाए ख़ूब देर तक उड़ती है
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Jan 27, 2019
Jan 27, 2019 at 5:48 PM UTC
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