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तन्हाई में कुछ पल... खुद को हँसाना चाहती हूँ । बंद कमरे में सन्नाटे में क्यों भीड़ का शोर हैं । मेरे दर्द की हर चीख़ को कुछ पल दबाना चाहती हूँ । जो बीत गया के जख्मों से रूह लहूलुहान हैं । वक्त के उस दौर को कुछ पल भुलाना चाहती हूँ । मैं अपनी रूह के साथ कुछ वक्त बिताना चाहती हूँ ।
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Mar 30, 2018
Mar 30, 2018 at 12:05 PM UTC
मैं अपनी रूह के साथ कुछ वक्त बिताना चाहती हूँ ।
तन्हाई में कुछ पल... खुद को हँसाना चाहती हूँ । बंद कमरे में सन्नाटे में क्यों भीड़ का शोर हैं । मेरे दर्द की हर चीख़ को कुछ पल दबाना चाहती हूँ । जो बीत गया के जख्मों से रूह लहूलुहान हैं । वक्त के उस दौर को कुछ पल भुलाना चाहती हूँ । मैं अपनी रूह के साथ कुछ वक्त बिताना चाहती हूँ ।
bhakti
Written by
26/F/India,Indore
Mar 30, 2018
Mar 30, 2018 at 12:05 PM UTC
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