लगे रूयी के गोले
लगे बरफ के गोले
बादलो के टुकड़े
लगे कितने सजीले
दूधिया सा रंग
फैला सुंदर सा गगन
मन चाहे इनमें झूलूँ
लूँ मस्त हिंडोलें
जितनी हँसी ज़मीन
उतना यह आसमा
क्या बन सकता है
बादलों का बिछओना
छू के देखा नहीं है
हाथों से पकड़ा नहीं है
लिया पानी की बूँदों ने
नया रूप सलोना
ना जेबों में भरा जाए
ना तिजोरी में समाए
क़ुदरत का क़ीमती
यह अनमोल ख़ज़ाना
कभी ग़ुस्से से गरजे
कभी प्यार से बरसे
जड़े कर्ण कर्ण में
ज़िंदगी का नगीना
Feb 12, 2021
Feb 12, 2021 at 2:12 PM UTC
लगे रूयी के गोले
लगे बरफ के गोले
बादलो के टुकड़े
लगे कितने सजीले
दूधिया सा रंग
फैला सुंदर सा गगन
मन चाहे इनमें झूलूँ
लूँ मस्त हिंडोलें
जितनी हँसी ज़मीन
उतना यह आसमा
क्या बन सकता है
बादलों का बिछओना
छू के देखा नहीं है
हाथों से पकड़ा नहीं है
लिया पानी की बूँदों ने
नया रूप सलोना
ना जेबों में भरा जाए
ना तिजोरी में समाए
क़ुदरत का क़ीमती
यह अनमोल ख़ज़ाना
कभी ग़ुस्से से गरजे
कभी प्यार से बरसे
जड़े कर्ण कर्ण में
ज़िंदगी का नगीना