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रात की तन्हाइयों में, चाँद सोया है बगल में, पूछता हूँ जुगनुओं से, कोई खोया था क्या कल में, ढूँढ ले आना अगर वो, मिले तुम्हारी रोशनी में। रात की तन्हाइयों में, चाँद सोया है बगल में। कानों को हैं सताते, किस्से कुछ अनकहे से, कानों को हैं सताते, किस्से कुछ अनकहे से, आँखों में हैं दबे कुछ, आँसू वो अनबहे से, आँसू वो अनबहे से। रात की तन्हाइयों में, चाँद सोया है बगल में, पूछता हूँ जुगनुओं से, कोई खोया था क्या कल में। लगता ऐसे है जैसे, मेरा सब कुछ खो गया है, शहरों के शोर में भी, सन्नाटा हो गया है। अक्स था जो साथ चलता, वो मुझमें खो गया है, ये क्या अब हो गया है, ये क्या अब हो गया है। रात की तन्हाइयों में, चाँद सोया है बगल में, पूछता हूँ जुगनुओं से, कोई खोया था क्या कल में, जाने ये क्या हो गया है, जो था कल तक खो गया है, जो था कल तक खो गया है, जाने ये क्या हो गया है।
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May 16
May 16, 2026 at 3:24 PM UTC
Koi kho gaya hai
रात की तन्हाइयों में, चाँद सोया है बगल में, पूछता हूँ जुगनुओं से, कोई खोया था क्या कल में, ढूँढ ले आना अगर वो, मिले तुम्हारी रोशनी में। रात की तन्हाइयों में, चाँद सोया है बगल में। कानों को हैं सताते, किस्से कुछ अनकहे से, कानों को हैं सताते, किस्से कुछ अनकहे से, आँखों में हैं दबे कुछ, आँसू वो अनबहे से, आँसू वो अनबहे से। रात की तन्हाइयों में, चाँद सोया है बगल में, पूछता हूँ जुगनुओं से, कोई खोया था क्या कल में। लगता ऐसे है जैसे, मेरा सब कुछ खो गया है, शहरों के शोर में भी, सन्नाटा हो गया है। अक्स था जो साथ चलता, वो मुझमें खो गया है, ये क्या अब हो गया है, ये क्या अब हो गया है। रात की तन्हाइयों में, चाँद सोया है बगल में, पूछता हूँ जुगनुओं से, कोई खोया था क्या कल में, जाने ये क्या हो गया है, जो था कल तक खो गया है, जो था कल तक खो गया है, जाने ये क्या हो गया है।
arvind-bhardwaj
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May 16
May 16, 2026 at 3:24 PM UTC
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