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निला निलासा गगन, निचेह‘े  हरी चौडीया सामने घनी बस्ती फाँटमे फ्m,ूल पंछिया हवाभी महेके समल समलके   जुल्फ  लहेराके अनाज होे भरि खेतोमे, नही कोइ पेट खाली —२ हाथ होगा कामोमे, नही होगा कोइ खाली परदेशके अप्ने, लौट आएङगे वापस प्यारि  भूमी होगा फिर खुस्हाली, गाउँमे लौटेगा दिवाली न रहेगा सिमाए,  न होगा धर्तीके  लकिरँे —२ भाइ भाइ कहेङगे सब , नही कोइ अनोखी आस्थाए न कहेगा काइ मेरा, न बने कोइ पराया दर्द तो होगा ही घाँउमे, मगर लगादे मलहम सभी आसु जब किसिके टप्के दिल रहे सबकी हैरानी —२ अनाज हो भरि खेतोमे नही कोइ पेट खाली न रहेगा कोइ मेरा न बने कोइ पराया दर्द तो होगा ही घाउमे, मगर लगादे मलहम सभी —२
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Mar 26, 2019
Mar 26, 2019 at 9:27 PM UTC
गाँउके सपने
निला निलासा गगन, निचेह‘े  हरी चौडीया सामने घनी बस्ती फाँटमे फ्m,ूल पंछिया हवाभी महेके समल समलके   जुल्फ  लहेराके अनाज होे भरि खेतोमे, नही कोइ पेट खाली —२ हाथ होगा कामोमे, नही होगा कोइ खाली परदेशके अप्ने, लौट आएङगे वापस प्यारि  भूमी होगा फिर खुस्हाली, गाउँमे लौटेगा दिवाली न रहेगा सिमाए,  न होगा धर्तीके  लकिरँे —२ भाइ भाइ कहेङगे सब , नही कोइ अनोखी आस्थाए न कहेगा काइ मेरा, न बने कोइ पराया दर्द तो होगा ही घाँउमे, मगर लगादे मलहम सभी आसु जब किसिके टप्के दिल रहे सबकी हैरानी —२ अनाज हो भरि खेतोमे नही कोइ पेट खाली न रहेगा कोइ मेरा न बने कोइ पराया दर्द तो होगा ही घाउमे, मगर लगादे मलहम सभी —२
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Mar 26, 2019
Mar 26, 2019 at 9:27 PM UTC
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