पत्थर तो तुम थे, हम तो पानी जैसे निश्चल है
जब आ ही गिरे, तो फर्क बस इतना ही पड़ा था—
पहले तो कुछ हलचल हुई,
पर पानी तो ऊपर ही आता गया।
तुम सिर्फ गिरते रहे,
पर तुम्हारे जैसा हर कोई डूबता गया।
वो वक्त और हालात
जो पकड़ में मेरे शायद नहीं थे,
पर उस वक्त का बदलना भी
कब मुझसे दूर था...
कल की क्या देखता है तू,
देखना है तो आज देख—
अब देख मेरे समय का लेख।
दीमक जैसी फितरत जो तुम्हारी,
बड़ी खोखली जो खामी है।
की थी कशिश जो तुमने
मिटाने की,
फिर भी देख तू आज
मैं तुम्हारे समक्ष खड़ा हूँ।
मैं हार नहीं मानता,
हमेशा ही बड़ी शिद्दत से लड़ा हूँ।
किरदार पर मेरे
तुम्हारे हाथों की झपट,
तुम्हारे मन में
सिर्फ बही छल-कपट।
फिर भी आज मैं पहले से
कई अधिक आगे बढ़ चुका हूँ,
अब मैं अपने भविष्य को भी
गढ़ चुका हूँ।
छल, द्वंद्व, द्वेष, कपट, प्रेम, बदनामी,
मित्रता, शत्रुता—
सब को पढ़ चुका हूँ।
कहीं छल से मेरा सामना था,
मैं खुद थमा,
जहाँ मुझे तुमको थामना था।
झुका मैं भी वहाँ,
जहाँ सिर्फ तुम्हें झुकना था।
पर अब मैं कभी नहीं थकूँगा,
अब सिर्फ तुमको थकना है।
मैं जो मेरे जीवन में जी रहा हूँ,
वो तो सिर्फ
तुम्हारा सपना है।
— By Mr नितिन कुमार मीना मोहचा
Dec 28, 2025
Dec 28, 2025 at 12:54 AM UTC
पत्थर तो तुम थे, हम तो पानी जैसे निश्चल है
जब आ ही गिरे, तो फर्क बस इतना ही पड़ा था—
पहले तो कुछ हलचल हुई,
पर पानी तो ऊपर ही आता गया।
तुम सिर्फ गिरते रहे,
पर तुम्हारे जैसा हर कोई डूबता गया।
वो वक्त और हालात
जो पकड़ में मेरे शायद नहीं थे,
पर उस वक्त का बदलना भी
कब मुझसे दूर था...
कल की क्या देखता है तू,
देखना है तो आज देख—
अब देख मेरे समय का लेख।
दीमक जैसी फितरत जो तुम्हारी,
बड़ी खोखली जो खामी है।
की थी कशिश जो तुमने
मिटाने की,
फिर भी देख तू आज
मैं तुम्हारे समक्ष खड़ा हूँ।
मैं हार नहीं मानता,
हमेशा ही बड़ी शिद्दत से लड़ा हूँ।
किरदार पर मेरे
तुम्हारे हाथों की झपट,
तुम्हारे मन में
सिर्फ बही छल-कपट।
फिर भी आज मैं पहले से
कई अधिक आगे बढ़ चुका हूँ,
अब मैं अपने भविष्य को भी
गढ़ चुका हूँ।
छल, द्वंद्व, द्वेष, कपट, प्रेम, बदनामी,
मित्रता, शत्रुता—
सब को पढ़ चुका हूँ।
कहीं छल से मेरा सामना था,
मैं खुद थमा,
जहाँ मुझे तुमको थामना था।
झुका मैं भी वहाँ,
जहाँ सिर्फ तुम्हें झुकना था।
पर अब मैं कभी नहीं थकूँगा,
अब सिर्फ तुमको थकना है।
मैं जो मेरे जीवन में जी रहा हूँ,
वो तो सिर्फ
तुम्हारा सपना है।
— By Mr नितिन कुमार मीना मोहचा
छल, द्वंद्व, द्वेष, कपट, प्रेम, बदनामी,
मित्रता, शत्रुता—
सब को पढ़ चुका हूँ।
