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कैसे छू लूं मैं तुमको, कहीं तेरा मैं हो ना जाऊँ, कैसे कह दूँ मैं तुमको, जो मैं कभी ना कह पाऊँ। कैसी कश्मकश है ये तो, बैठी तुम हो पर फिर भी मैं, कहना चाहूँ पर फिर भी, लब को कैसे समझाऊँ। कैसे छू लूं मैं तुमको, कहीं तेरा मैं हो ना जाऊँ, कैसे छू लूं मैं तुमको, कहीं तेरा मैं हो ना जाऊँ। नाज़ुक सा दिल है तेरा, ना टूटे ये डर लगता है, बढ़ कर इस रिश्ते से, कुछ है पर क्यों कम लगता है। होना मैं चाहूँ तेरा, क्या तू भी चाहे कुछ ऐसा, किस्से अपनी यादों के, पन्नों में ना यूँ रह जाएँ। कैसे छू लूं मैं तुमको, कहीं तेरा मैं हो ना जाऊँ, कैसे छू लूं मैं तुमको, कहीं तेरा मैं हो ना जाऊँ। देखूँ मैं तुझको बस यूँ, आँखों से समझ तुम जाना, पलकों की दस्तक से तुम, अपने दिल को समझाना। कैसे छू लूं मैं तुमको, कहीं तेरा मैं हो ना जाऊँ, कैसे कह दूँ मैं तुमको, जो मैं कभी ना कह पाऊँ।
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May 12
May 12, 2026 at 4:58 AM UTC
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कैसे छू लूं मैं तुमको, कहीं तेरा मैं हो ना जाऊँ, कैसे कह दूँ मैं तुमको, जो मैं कभी ना कह पाऊँ। कैसी कश्मकश है ये तो, बैठी तुम हो पर फिर भी मैं, कहना चाहूँ पर फिर भी, लब को कैसे समझाऊँ। कैसे छू लूं मैं तुमको, कहीं तेरा मैं हो ना जाऊँ, कैसे छू लूं मैं तुमको, कहीं तेरा मैं हो ना जाऊँ। नाज़ुक सा दिल है तेरा, ना टूटे ये डर लगता है, बढ़ कर इस रिश्ते से, कुछ है पर क्यों कम लगता है। होना मैं चाहूँ तेरा, क्या तू भी चाहे कुछ ऐसा, किस्से अपनी यादों के, पन्नों में ना यूँ रह जाएँ। कैसे छू लूं मैं तुमको, कहीं तेरा मैं हो ना जाऊँ, कैसे छू लूं मैं तुमको, कहीं तेरा मैं हो ना जाऊँ। देखूँ मैं तुझको बस यूँ, आँखों से समझ तुम जाना, पलकों की दस्तक से तुम, अपने दिल को समझाना। कैसे छू लूं मैं तुमको, कहीं तेरा मैं हो ना जाऊँ, कैसे कह दूँ मैं तुमको, जो मैं कभी ना कह पाऊँ।
arvind-bhardwaj
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May 12
May 12, 2026 at 4:58 AM UTC
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