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तू चाँद है, मैं वो आसमाँ हूँ, तू बोल है, मैं वो जुबाँ हूँ। तू कविता है, मैं वो कवि हूँ, तू खुश-नसीबी है, मैं वो खुश-नसीब हूँ। आख़िर तू मोहब्बत है, और मैं बस एक नादान हूँ। तू एक हकीकत है, और मैं बस एक चलवा हूँ।"
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Feb 10, 2025
Feb 10, 2025 at 7:57 AM UTC
तु खास है, मै आम हु
तू चाँद है, मैं वो आसमाँ हूँ, तू बोल है, मैं वो जुबाँ हूँ। तू कविता है, मैं वो कवि हूँ, तू खुश-नसीबी है, मैं वो खुश-नसीब हूँ। आख़िर तू मोहब्बत है, और मैं बस एक नादान हूँ। तू एक हकीकत है, और मैं बस एक चलवा हूँ।"
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Written by
15/M/Maharashtra
Feb 10, 2025
Feb 10, 2025 at 7:57 AM UTC
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