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खुद की खोज में हूं.... भ्रमित हूं
क्या हो रहा है न जान पा रहा है कोई क्यों खो रहे है सब ये अजीब सोच जाग रही है घुटन सी होती है इन दीवारों में अपने ही घर मै बन्द नहीं रह पाते तो उन जानवरो का क्या होता होगा जो अपने घर मै भी नहीं बस किसी अनजान सी जगह मै नजर बन्द है जिसे वो जानते भी नहीं ओर लोग उन्हें यूं देखते है जैसे वो कोई सामान हो उनके भी हाल हमारे जैसे ही होंगे शायद हमसे बत्तर हम कुछ दिन नहीं झेल पा रहे वो सालों साल कैसे जीते है शायद घुटन से ही वो मर जाते है।
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Jun 10, 2020
Jun 10, 2020 at 1:48 PM UTC
घुटन
मानवता जैसे खत्म हो रही थी अपने आप मै ही सब नस्ट हो रहे थे गीता मै कृष्ण ने कहा था... कलयुग सबसे बड़ा युग होगा जिसके उपरांत संशार का अंत होगा पर शायद अभी कलयुग का अंत करीब नहीं अभी एक जीवाणु से बचने की कोशिश में लोगो को भावनाए समझ मै आने लगी है लोग इस बनावटी दुनिया मै पहली बार शायद अपनों के करीब आ रहे है अपने आप को शायद पहचान रहे है शायद सुकून की नींद सो रहे है पहली बार शायद पुजारियों या मंदिरों मै रखी पत्थर की मूर्ति की जगह अपने आस पास रहने वाले लोगों पर अपने साथ रहने वाले लोगों पर भरोसा कर रहे है इस शंकट की घड़ी मै आखिरकार लोगो को एक दूसरे मै ही भगवान देखना चाहिए, ऐवम एक दूसरे का सहारा बनना चाहिए ये बात समझ मै आ जाए शायद इस जीवाणु की वजह से ही लोग अपने आप को ओर अपनी इस प्रकृति को..... एवं मानवता को फिर से समझ जाए।
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Apr 18, 2020
Apr 18, 2020 at 3:11 PM UTC
जीवाणु २०२०
मानवता जैसे खत्म हो रही थी अपने आप मै ही सब नस्ट हो रहे थे गीता मै कृष्ण ने कहा था... कलयुग सबसे बड़ा युग होगा जिसके उपरांत संशार का अंत होगा पर शायद अभी कलयुग का अंत करीब नहीं अभी एक जीवाणु से बचने की कोशिश में लोगो को भावनाए समझ मै आने लगी है लोग इस बनावटी दुनिया मै पहली बार शायद अपनों के करीब आ रहे है अपने आप को शायद पहचान रहे है शायद सुकून की नींद सो रहे है पहली बार शायद पुजारियों या मंदिरों मै रखी पत्थर की मूर्ति की जगह अपने आस पास रहने वाले लोगों पर अपने साथ रहने वाले लोगों पर भरोसा कर रहे है इस शंकट की घड़ी मै आखिरकार लोगो को एक दूसरे मै ही भगवान देखना चाहिए, ऐवम एक दूसरे का सहारा बनना चाहिए ये बात समझ मै आ जाए शायद इस जीवाणु की वजह से ही लोग अपने आप को ओर अपनी इस प्रकृति को..... एवं मानवता को फिर से समझ जाए।
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Kahi kho se gayi hu Khud ko hi dhundh rahi hu Bechaini se chaa gayi hai man Mai Shayad Mai kuch galat Kar rahi hu Ya shayad sahi karne ki chah hai Ya kahi ye to nahi sahi ko jaanti hi nahi Man vichar raha hai Man ki shaanti kahi kho si gayi hai N jaane kyo ** raha hai ye Apne aap par hi dhyaan nahi N jaane kaha kho Diya hai Maine khud ko hi Kya ** raha hai ,Kya hona cahiye Kya sochti hu ,Kya karna cahti hu Uljhan hi uljhan hai Kuch samjhne ke kosis Kar rahi hi shayad Ya shayad khud ko or uljhan Mai daal rahi hu Kya ** raha hai Kya chah rahi hu Kuch man vichran karne Mai laga hai Kuch vyaakul para hai,kuch hissa to iska Jalan sheel ** rakah hai Kuch apne aap se hi Lara hai Kuch chin bhinn hone ko taoyaar nahi Kuch khud ko phir se paane ki aash lagaye baitha hai Man bas vyaakul ** rakha hai.
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Apr 12, 2020
Apr 12, 2020 at 4:49 PM UTC
Man ki vyaakulta
न जाने क्या हुआ किसके साथ हुआ कुछ समझ नहीं आता मै हूं या मेरा शरीर जो मुझे युं कचोट रहा कुछ ख्वाहिशें है कुछ सपने है जो शायद कहीं खो गए है उन सपनों को वापस पाने की आशा मै उन पुराने खंदरो को साफ करने चली हूं कर के रहूंगी करना है तो बस दुबारा ध्यान n भटके करना ही बस खान तो लिया है बस ध्यान n भटके ये देखना है।
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Apr 6, 2020
Apr 6, 2020 at 1:51 PM UTC
Pata नहीं
क्या चाहती हूं, खुद को समझ नहीं पा रही, न जाने ये राहे मुझे कहा ले जा रही भटक सी गई हूं, खो सी गई हूं,दुनिया की इन अनजान राहो में खुद से खुद का राबता करने के लिए बेचैन सी हो गई हूं खुद से ही उदाश हूं ,खुद की ही खाश हूं खुद पर भरोसा है भी,पर खुद पर सख़ भी है, किसी से प्यार करती भी हूं पर खुद को उसके काबिल बनाने से डरती भी ही डरती ही की ,कहीं खुद को ना खो दू,... खुदको उसके काबिल बनाने मै उसे छोड़ने की भी हिम्मत नहीं पर शायद हिम्मत आ गई है अब बस सही रास्ता मिलने की देर है बस खुद को पाने की आस है।
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Jan 28, 2020
Jan 28, 2020 at 3:50 PM UTC
।।।।।।।।।
My heart temperature is dropping, What's going on with my heart, It seems like it just has frozen What to do...? Is it that my heart has stopped pumping blood Or it has given the work to someone else But at last I discovered It had started feeling more.. It should stop How could it be so feeling full... In this practical world how could it be So emotional.. I would stop it It should be stopped Right now, STOP! STOP! STOP! being foolosh, Feeling many things It's too much Just STOP!!
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Dec 31, 2019
Dec 31, 2019 at 3:20 AM UTC
❤️
डर का एहसास हो रहा है कुछ तो खोता जा रहा है समझ नहीं आ रहा क्या पर कुछ तो कैसे ढूंढू उस चीज को कैसे खोने से रोकूं उस चीज या एहसास को जो कया है मै जानती ही नहीं कुछ तो छूट रहा है कुछ तो खो रहा है न जाने क्या है कैसा है,क्यों है पर कुछ तो क्यों कुछ खो सा रहा है न जाने क्या है को मुझे रुआशा कर रहा है।
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Dec 6, 2019
Dec 6, 2019 at 1:42 PM UTC
खोती हुई अनजान
इतना सब होने के बावजूद भी... कैसे हीमत करती हो किसी को अपना मानने की किसी को अच्छा समझने की... किसी पर भरोसा करने की इन्सानियत का सरे आम खून होने पर... आखिर कैसे.... कैसे खुद को समझाती हो..की दुनिया अच्छी है यहां के लोग अच्छे है... वापस कैसे दूसरो से प्यार कर पाती हो... उन्हें प्यार दे पाती हो एक बार तुम सोचो तो घीन तुम्हे भी आयी थी न.. इस दुनिया के लोगो से...इनके मन मै पल रहे सडयंतरो से....फिर कैसे... आखिर कैसे तुम.... प्यार करने की उन्हें छूने तक की हिम्मत रखती हो.. माना कि तुम एक मा हो.... अपने बच्चे को बिना छुए...बिना पुचकारे रहना भी मुश्किल है... पर तुम एक औरत भी तो हो उसका क्या...आखिर कैसे.... माना कि एक पत्नी हो.... तुम्हारे पति से तुम्हे मोहब्बत हो सकती है.... पर क्या तुम्हे उसे देखकर डर नहीं लगता... उसे देखकर तुम्हारा दिल नहीं दहेलता... क्या ये याद नहीं आता कि वो भी एक मर्द है.... आखिर कर तुम एक औरत हो.... कैसे इतना सब्र,इतना इंतज़ार,इतना भरोसा लाती हो.. कैसे तुम अपने आप को संभालती हो.... आखिर कैसे.... माना कि एक बेटी हो तुम... अपने अब्बू से लगाव है तुम्हे... जान छिड़कती हो उनपे पर क्या ...तुम्हे अनपर इतना भरोसा करना सही है! जिस तरह औरतों को नोचा, चिथोरा जा रहा है... आखिर कैसे तुम.... कैसे तुम किसी आदमी पर इतना भरोसा रखती हो... भरोसे का जहा रोज़ खून हो रहा है... वहां आखिर कैसे तुम इतना भरोसा दिखाती हो.... कैसे इतना प्यार बरसाती हो... कुछ भी कहो..... पर आखिर तुम भी एक औरत हो... इतना भरोसा ओर प्यार कहा से लाती हो.... आखिर कैसे इस दुनिया मै रोज़ उठकर भरोसा ओर प्यार डालने की हिम्मत लाती हो..... औरत क्या तुम सच मै इतनी बलशाली हो!।
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Dec 6, 2019
Dec 6, 2019 at 6:49 AM UTC
औरत- प्यार और भरोसा
इतना सब होने के बावजूद भी... कैसे हीमत करती हो किसी को अपना मानने की किसी को अच्छा समझने की... किसी पर भरोसा करने की इन्सानियत का सरे आम खून होने पर... आखिर कैसे.... कैसे खुद को समझाती हो..की दुनिया अच्छी है यहां के लोग अच्छे है... वापस कैसे दूसरो से प्यार कर पाती हो... उन्हें प्यार दे पाती हो एक बार तुम सोचो तो घीन तुम्हे भी आयी थी न.. इस दुनिया के लोगो से...इनके मन मै पल रहे सडयंतरो से....फिर कैसे... आखिर कैसे तुम.... प्यार करने की उन्हें छूने तक की हिम्मत रखती हो.. माना कि तुम एक मा हो.... अपने बच्चे को बिना छुए...बिना पुचकारे रहना भी मुश्किल है... पर तुम एक औरत भी तो हो उसका क्या...आखिर कैसे.... माना कि एक पत्नी हो.... तुम्हारे पति से तुम्हे मोहब्बत हो सकती है.... पर क्या तुम्हे उसे देखकर डर नहीं लगता... उसे देखकर तुम्हारा दिल नहीं दहेलता... क्या ये याद नहीं आता कि वो भी एक मर्द है.... आखिर कर तुम एक औरत हो.... कैसे इतना सब्र,इतना इंतज़ार,इतना भरोसा लाती हो.. कैसे तुम अपने आप को संभालती हो.... आखिर कैसे.... माना कि एक बेटी हो तुम... अपने अब्बू से लगाव है तुम्हे... जान छिड़कती हो उनपे पर क्या ...तुम्हे अनपर इतना भरोसा करना सही है! जिस तरह औरतों को नोचा, चिथोरा जा रहा है... आखिर कैसे तुम.... कैसे तुम किसी आदमी पर इतना भरोसा रखती हो... भरोसे का जहा रोज़ खून हो रहा है... वहां आखिर कैसे तुम इतना भरोसा दिखाती हो.... कैसे इतना प्यार बरसाती हो... कुछ भी कहो..... पर आखिर तुम भी एक औरत हो... इतना भरोसा ओर प्यार कहा से लाती हो.... आखिर कैसे इस दुनिया मै रोज़ उठकर भरोसा ओर प्यार डालने की हिम्मत लाती हो..... औरत क्या तुम सच मै इतनी बलशाली हो!।
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कुछ परेशान सी हूं.... बताना चाहती हूं ये अपने करीबी लोगों को अपने आप से परेशान हूं ..... जहन मै बस ये ख्याल आता है आखिर क्यों हूं क्या कर रही हूं यहां क्या सिर्फ वायु बर्बाद कर रही हूं या दूसरो पे बोझ बनी हूं पूछना चाहती हूं सब से क्या बोझ लगती हूं आपको न जाने कहां खो सी गई हूं कभी कभी लगता है गलत जगह पर आकर फस गई हूं मन करता है मां को बिठाऊं ओर पुछु ... क्यों हूं मै जब किसी लायक नहीं तो क्यों भगवान जी को आप नहीं कहती कि उठा ले इसे भगवान ही ही सच बात दे शायद क्या हूं ओर क्यों खो गई हूं न जाने क्या चलता है दिमाग मै क्यों इतना सोचने के बाद भी एक फैसले के लिए सबकी राए लेनी पड़ती है खुद का क्या कुछ नहीं है मेरा खुद की कोई पसंद या अष्टित्व नहीं है क्या खुद क्या हूं.... सच मै मां बहुत खोई सी हूं मै लगता है बस मर रही हूं डर लगता है अपने आप से दुनिया को तो छोड़ो...उससे तो नहीं डरती पर अपने आप से डर लगता है ओर मा जब तुम ओर पापा भी साथ नहीं देते न तो बस यही सवाल आता है क्या मै इतनी गलत हूं कुछ सही नहीं कर सकती क्या इतनी बुरी हूं मै हमेशा अपने आप को ही कोष्टी हूं पर क्या करू आप से भी कभी कह नहीं पाती क्योंकि डरती हूं आपके डर से ओर आप समझ नहीं पाती या शायद मै समझा नहीं पाती जो भी है बस मै आपको अपने दिल की बात नहीं बता पाती दुख होता है मा रोना आता है पर नहीं रोती,बस थोड़ी हिम्मत जुटाई है कुछ दिन ओर जुटा कर बस सबसे दूर चली जाऊंगी चिंता मत कर मां तुझे तकलीफ ना पहुंचाऊंगी
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Nov 11, 2019
Nov 11, 2019 at 3:56 PM UTC
खोती जा रही हूं
कुछ परेशान सी हूं.... बताना चाहती हूं ये अपने करीबी लोगों को अपने आप से परेशान हूं ..... जहन मै बस ये ख्याल आता है आखिर क्यों हूं क्या कर रही हूं यहां क्या सिर्फ वायु बर्बाद कर रही हूं या दूसरो पे बोझ बनी हूं पूछना चाहती हूं सब से क्या बोझ लगती हूं आपको न जाने कहां खो सी गई हूं कभी कभी लगता है गलत जगह पर आकर फस गई हूं मन करता है मां को बिठाऊं ओर पुछु ... क्यों हूं मै जब किसी लायक नहीं तो क्यों भगवान जी को आप नहीं कहती कि उठा ले इसे भगवान ही ही सच बात दे शायद क्या हूं ओर क्यों खो गई हूं न जाने क्या चलता है दिमाग मै क्यों इतना सोचने के बाद भी एक फैसले के लिए सबकी राए लेनी पड़ती है खुद का क्या कुछ नहीं है मेरा खुद की कोई पसंद या अष्टित्व नहीं है क्या खुद क्या हूं.... सच मै मां बहुत खोई सी हूं मै लगता है बस मर रही हूं डर लगता है अपने आप से दुनिया को तो छोड़ो...उससे तो नहीं डरती पर अपने आप से डर लगता है ओर मा जब तुम ओर पापा भी साथ नहीं देते न तो बस यही सवाल आता है क्या मै इतनी गलत हूं कुछ सही नहीं कर सकती क्या इतनी बुरी हूं मै हमेशा अपने आप को ही कोष्टी हूं पर क्या करू आप से भी कभी कह नहीं पाती क्योंकि डरती हूं आपके डर से ओर आप समझ नहीं पाती या शायद मै समझा नहीं पाती जो भी है बस मै आपको अपने दिल की बात नहीं बता पाती दुख होता है मा रोना आता है पर नहीं रोती,बस थोड़ी हिम्मत जुटाई है कुछ दिन ओर जुटा कर बस सबसे दूर चली जाऊंगी चिंता मत कर मां तुझे तकलीफ ना पहुंचाऊंगी
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हमने ये आज जान लिया दुनिया मै कोई न देगा हमारा साथ, हमने तो सोचा था,है हमारे को खास जिन्हे करना चाहते थे अपने साथ चाहते थे हर सुबह जिनका दीदार करना चाहते थे जिनसे ऐतवार जिनको देना चाहते थे दिल अपना जिनसे की थी वाफा हमने सहेलियां जानती थी जिन्हे हम चाहते थे जिन्हे सोचते थे है वो हमारे साथी और क्या ही प्रशंसा करे उनकी जिनके नाम से सारे मंत्र सुरु होते है ऐसी बेवफाई के उन्होंने गए थे किसी गलती के माफ़ी मांगने उन्होंने कुछ और ही समझ लिया थमा दिया किसी और के हाथो मै समझ कर हमारी माफ़ी को कुछ और फशा दिया एक धर्मसंकट मै फिर भी हमारा दिल है क्या माना नहीं बिना आपके बिना आपकी आवाज़ सुने आप पे फिद्दा ऐसे हुए की गाली भी अगर आपको दे तो दर्द हमारे दिल को होता है।
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Oct 10, 2019
Oct 10, 2019 at 3:20 PM UTC
दर्दे दिल
हमने ये आज जान लिया दुनिया मै कोई न देगा हमारा साथ, हमने तो सोचा था,है हमारे को खास जिन्हे करना चाहते थे अपने साथ चाहते थे हर सुबह जिनका दीदार करना चाहते थे जिनसे ऐतवार जिनको देना चाहते थे दिल अपना जिनसे की थी वाफा हमने सहेलियां जानती थी जिन्हे हम चाहते थे जिन्हे सोचते थे है वो हमारे साथी और क्या ही प्रशंसा करे उनकी जिनके नाम से सारे मंत्र सुरु होते है ऐसी बेवफाई के उन्होंने गए थे किसी गलती के माफ़ी मांगने उन्होंने कुछ और ही समझ लिया थमा दिया किसी और के हाथो मै समझ कर हमारी माफ़ी को कुछ और फशा दिया एक धर्मसंकट मै फिर भी हमारा दिल है क्या माना नहीं बिना आपके बिना आपकी आवाज़ सुने आप पे फिद्दा ऐसे हुए की गाली भी अगर आपको दे तो दर्द हमारे दिल को होता है।
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