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puja
Kavitaon me apni talash
रात का दामन थामे, सपनों का इंतज़ार, नींद जो रूठी रहे… कैसे हो दीदार?
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Nov 14, 2025
Nov 14, 2025 at 3:27 PM UTC
Nind
जैसे रेगिस्तान में उठती ज़िंदगी के बवंडर को, कोई चाँदनी रात में झील का किनारा मिला हो। जैसे दिन के उजालों में गूंजते हर इक शोर को, ख़ामोशी भरी रात की गुनगुनाहट का स्पर्श मिला हो। ऐसा लगता है मेरी ज़िंदगी की उथल-पुथल को, तेरी साँसों की गरमाहट में सिमटकर कोई मखमली सुकून मिला हो।
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Nov 13, 2025
Nov 13, 2025 at 11:48 PM UTC
Sukoon
प्रेम, तुम हो... मुझमें मेरी धड़कन बन कर धड़कते तुम हो। मानो, अब मैं भी तुम ही हो।
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Nov 13, 2025
Nov 13, 2025 at 11:31 PM UTC
प्रेम
​ठहरे हैं आज भी उसी मोड़ पर हम, जहाँ से जुदा हुए, इस जहान से हम।
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Nov 13, 2025
Nov 13, 2025 at 11:36 AM UTC
Jahan
चंद लम्हें तेरे कूचे में ठहर जाने की इजाज़त दे दे ​बिखर जाने से पहले संभल जाने की मोहलत दे दे ​तू दरगाह है मेरा, या तू खुदा ​मेरी रुख़सती से पहले तेरे दीदार की रहमत दे दे
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Nov 13, 2025
Nov 13, 2025 at 11:07 AM UTC
इल्तिजा