रात का दामन थामे, सपनों का इंतज़ार,
नींद जो रूठी रहे… कैसे हो दीदार?
Nov 14, 2025
Nov 14, 2025 at 3:27 PM UTC
जैसे रेगिस्तान में उठती ज़िंदगी के बवंडर को,
कोई चाँदनी रात में झील का किनारा मिला हो।
जैसे दिन के उजालों में गूंजते हर इक शोर को,
ख़ामोशी भरी रात की गुनगुनाहट का स्पर्श मिला हो।
ऐसा लगता है मेरी ज़िंदगी की उथल-पुथल को,
तेरी साँसों की गरमाहट में सिमटकर कोई मखमली सुकून मिला हो।
Nov 13, 2025
Nov 13, 2025 at 11:48 PM UTC
प्रेम, तुम हो...
मुझमें मेरी धड़कन बन कर धड़कते तुम हो।
मानो, अब मैं भी तुम ही हो।
Nov 13, 2025
Nov 13, 2025 at 11:31 PM UTC
ठहरे हैं आज भी उसी मोड़ पर हम,
जहाँ से जुदा हुए, इस जहान से हम।
Nov 13, 2025
Nov 13, 2025 at 11:36 AM UTC
चंद लम्हें तेरे कूचे में ठहर जाने की इजाज़त दे दे
बिखर जाने से पहले संभल जाने की मोहलत दे दे
तू दरगाह है मेरा, या तू खुदा
मेरी रुख़सती से पहले तेरे दीदार की रहमत दे दे
Nov 13, 2025
Nov 13, 2025 at 11:07 AM UTC