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aparajita-shrivastava
घूमने फिरने के जमाने मे एक ठहराव ढूँढ रही हूँ महलों की ख्वाहिश नहीं है मुझे जहाँ तू साथ हो ऐसा घर ढूंढ रही हूँ सिर्फ तुझसे चीज़े लेने की चाह नहीं कुछ तुझे देने की खुशी ढूँढ रही हूँ साथ खुश हो मेरे तू हर पल मैं तो एक ऐसा कल ढूँढ रही हूँ सबूत नहीं मेरे प्यार का मेरे पास जो तुझको मैं जवाब दे सकूँ पर तु समझे मेरे प्यार को एक बार मैं एक ऐसा पल ढूँढ रही हूँ महलो की ख़्वाहिश नहि है मुझे जहाँ तू साथ हो मैं तो ऐसा घर ढूँढ रही हूँ
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Dec 2, 2019
Dec 2, 2019 at 2:34 PM UTC
घर ढूँढ रही हूँ