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Balkrishna
Balkrishna
44/M/New Delhi Name: Bal Krishna Mishra / Education: B.Sc., M.Sc., MBA. / Mobile Number: 8700462852 / Date of Birth: 22-01-1981. / Place of Birth: Darbhanga, Bihar. / Current Residence: Delhi. / Hobbies: Teaching Chemistry and writing poetry. / E-mail: [email protected]
वो तप है, धर्म है, विवेक है, कर्म है वो विद्या है, बुद्धि है, बल है, श्रम है || वो श्री है, शक्ति है, श्रेष्ठ है, संबल है, वो जनक है, पालक है, पोषक है वो जल , धरा , गगन, वायु , अग्नि, सूर्य , चंद्र है , वो मेरे स्वर्ग हैं || वो कर्तव्य है, प्रतिष्ठा है, उपासना है, वो धन है, धर्म है ,सुख है, प्रार्थना है वो वेद है, उपनिषद है, भक्ति है वो कृष्ण के श्लोक, राम की चौपाई है वो मेरे पिता हैं || ~बाल कृष्ण मिश्रा , नई दिल्ली | मोबाइल : 8700462852. E-mail: [email protected]
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1d ago
Jun 2, 2026 at 7:33 AM UTC
|| पिता ||
🥀 हां तुम ! मैंने चाहा है तुमको मेरी चाहतों में तुम I गुजरे कल में तुम उगते सूरज में तुम I बहती हवाओं में तुम बरसते बादलों में तुम I खिलते फूलों में तुम ढलती शामों में तुम I हां तुम ! मन की सुंदरता तन का सुंदर रूप I लब तेरे मधुशाला हर अंग पुष्प की माला I स्वप्न की परी तुम हो यौवन रस का अमृत प्याला I हां तुम ! तुम जीवन ज्योति तुम करुणा तुम भक्ति तुम ही मेरा बंधन I मेरा इश्क तुम मेरी जान तुम मेरा हर लम्हा तुमसे तुम ही मेरा दर्पण I हां तुम ! बेचैन दिल तन्हा मन तस्वीर तेरी चूमते नयन I मिलकर तुमसे लिपटूंँ मैं ऐसे जैसे चंदन से लिपटे भुजंग I मेरा ख्वाब मेरी हकीकत मेरी चाहत मेरा जूनू हां तुम ! ~बाल कृष्ण मिश्रा , नई दिल्ली | मोबाइल : 8700462852.
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1d ago
Jun 2, 2026 at 7:27 AM UTC
हां तुम !
🥀 हां तुम ! मैंने चाहा है तुमको मेरी चाहतों में तुम I गुजरे कल में तुम उगते सूरज में तुम I बहती हवाओं में तुम बरसते बादलों में तुम I खिलते फूलों में तुम ढलती शामों में तुम I हां तुम ! मन की सुंदरता तन का सुंदर रूप I लब तेरे मधुशाला हर अंग पुष्प की माला I स्वप्न की परी तुम हो यौवन रस का अमृत प्याला I हां तुम ! तुम जीवन ज्योति तुम करुणा तुम भक्ति तुम ही मेरा बंधन I मेरा इश्क तुम मेरी जान तुम मेरा हर लम्हा तुमसे तुम ही मेरा दर्पण I हां तुम ! बेचैन दिल तन्हा मन तस्वीर तेरी चूमते नयन I मिलकर तुमसे लिपटूंँ मैं ऐसे जैसे चंदन से लिपटे भुजंग I मेरा ख्वाब मेरी हकीकत मेरी चाहत मेरा जूनू हां तुम ! ~बाल कृष्ण मिश्रा , नई दिल्ली | मोबाइल : 8700462852.
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।। माँ पार्वती शक्ति तांडव स्तुति ✍️ || || संस्कृत काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ || _________________________________ प्रचंड शक्ति रूपिणीं, नमामि देवी अंबिकाम्। जगत् जननीं जगन्मयीं, नमामि दिव्य चंद्रिकाम्॥ नृत्यति शिव सान्निध्ये, शक्ति तांडव कारिणी। दुष्ट दलन हारिणी, भक्त कष्ट निवारिणी॥ कनत कनक कंकणम्, झणत झणत नूपुरम्। रणत रणत डमरूम्, भरत सकल अम्बरम्॥ जटा मुकुट शोभितां, अर्ध चन्द्र धारिणीम्। त्रिशूल खड्ग धारिणीं, असुर गर्व हारिणीम्॥ महागौरी महाकाली, महालक्ष्मी स्वरूपिणी। सृष्टि स्थिति विनाशनी, मोक्ष मार्ग दर्शिनी॥ बाल कृष्ण मिश्रा मति, शक्ति चरणे अर्पिता। पातु मां जगदम्बिका, भक्ति भाव वर्धिता॥ _______________________________________ ✍️ रचनाकार -- बाल कृष्ण मिश्रा 🏠 स्थान -- नई दिल्ली 📧 ई-मेल -- [email protected] Bal Krishna Mishra 🙏 _______________________________________
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1d ago
Jun 2, 2026 at 7:04 AM UTC
|| माँ पार्वती शक्ति तांडव स्तुति ||
।। माँ पार्वती शक्ति तांडव स्तुति ✍️ || || संस्कृत काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ || _________________________________ प्रचंड शक्ति रूपिणीं, नमामि देवी अंबिकाम्। जगत् जननीं जगन्मयीं, नमामि दिव्य चंद्रिकाम्॥ नृत्यति शिव सान्निध्ये, शक्ति तांडव कारिणी। दुष्ट दलन हारिणी, भक्त कष्ट निवारिणी॥ कनत कनक कंकणम्, झणत झणत नूपुरम्। रणत रणत डमरूम्, भरत सकल अम्बरम्॥ जटा मुकुट शोभितां, अर्ध चन्द्र धारिणीम्। त्रिशूल खड्ग धारिणीं, असुर गर्व हारिणीम्॥ महागौरी महाकाली, महालक्ष्मी स्वरूपिणी। सृष्टि स्थिति विनाशनी, मोक्ष मार्ग दर्शिनी॥ बाल कृष्ण मिश्रा मति, शक्ति चरणे अर्पिता। पातु मां जगदम्बिका, भक्ति भाव वर्धिता॥ _______________________________________ ✍️ रचनाकार -- बाल कृष्ण मिश्रा 🏠 स्थान -- नई दिल्ली 📧 ई-मेल -- [email protected] Bal Krishna Mishra 🙏 _______________________________________
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|| दिव्य शक्ति तांडव ✍️ || || संस्कृत काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ || ___________________________________ सत सृष्टि तांडव रचयिता, सत्यं स्वरूपं, शिव शक्तिं, कल्याणं कारणं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः। नाट्यराजं, महाशक्ति, पार्वती कल्याणी, शुभंकारी, महाकाली, शक्ति तांडव नमो नमः॥१॥ ज्ञानं स्वरूपा, शक्ति रूपा, प्रेमं, शांति, अमृतं, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः। नृत्यं स्वरूपा, नृत्यं रूपा, नृत्यं, नृत्यं, नृत्यं, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः॥२॥ दिव्यं स्वरूपा, दिव्यं रूपा, दिव्यं, दिव्यं, दिव्यं, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः। शक्ति तांडव, शक्ति तांडव, शक्ति तांडव, शक्ति तांडव, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः॥३॥ ॐ नमः शिवायै च शिवायै च नमो नमः। ~बाल कृष्ण मिश्रा , नई दिल्ली |
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Feb 26
Feb 26, 2026 at 12:11 AM UTC
|| दिव्य शक्ति तांडव ||
|| दिव्य शक्ति तांडव ✍️ || || संस्कृत काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ || ___________________________________ सत सृष्टि तांडव रचयिता, सत्यं स्वरूपं, शिव शक्तिं, कल्याणं कारणं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः। नाट्यराजं, महाशक्ति, पार्वती कल्याणी, शुभंकारी, महाकाली, शक्ति तांडव नमो नमः॥१॥ ज्ञानं स्वरूपा, शक्ति रूपा, प्रेमं, शांति, अमृतं, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः। नृत्यं स्वरूपा, नृत्यं रूपा, नृत्यं, नृत्यं, नृत्यं, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः॥२॥ दिव्यं स्वरूपा, दिव्यं रूपा, दिव्यं, दिव्यं, दिव्यं, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः। शक्ति तांडव, शक्ति तांडव, शक्ति तांडव, शक्ति तांडव, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः॥३॥ ॐ नमः शिवायै च शिवायै च नमो नमः। ~बाल कृष्ण मिश्रा , नई दिल्ली |
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|| श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति ✍️ || || संस्कृत काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ || _______________________________________ कुचेल-केश-पाश-बद्ध-मल्लिका-सुगन्धिनी, उमेश-वाम-भाग-नित्य-केलि-कंज-धारिणी। अशोक-पुष्प-पल्लवैः सु-रञ्जित-स्व-मूर्धनी, करोतु शक्ति-ताण्डवं सदा शिवा भवानी ||१|| ललाट-बिन्दु-सिन्धु-रक्त-रञ्जिता-स्व-भालका, धनुर्धरा त्रिशूलिनी कपाल-पाश-धारिणी। कराल-काल-मर्दिनी समस्त-दुःख-हारिणी, नमामि शैल-पुत्रिणीं सदा शिवा भवानी ||२|| रणत्-क्वणत्-कणत्-किङ्किणी-नूपुर-घोष-मण्डिता, चलत्-चलत्-पद-क्रमैः सु-विश्व-चक्र-चालिनी। अघोर-रूप-धारिणी घोर-शत्रु-घातिनी, प्रचण्ड-शक्ति-रूपिणी सदा शिवा भवानी ||३|| जगज्जननी पावनी प्रसन्न-मन्द-हासिनी, सु-भक्त-वृन्द-वन्दिता समस्त-विघ्न-नाशिनी। प्रलय-वह्नि-रञ्जिता महानिभय-दायिनी, जयतु जयतु पार्वती सदा शिवा भवानी ||४|| जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्प-निर्झरी, विलोम-शक्ति-रूपिणी कराल-खड्ग-धारिणी। धगद्-धगद्-धगज्-ज्वलत्-ललाट-पट्ट-पावके, किशोर-चन्द्र-शेखरे रतिं प्रतिक्षणं मम ||५|| महा-विचित्र-नृत्त-नाद-डम्ब-डम्ब-डम्बिका, प्रचण्ड-मुण्ड-मण्डली-गले-विराज-मालिका। दश-दिगन्त-गामिनी सु-तेज-पुञ्ज-भासिनी, पुनातु माँ सदा-सदा उमा-महेश्वरी विभू ||६|| नितम्ब-चन्द्र-कान्ति-कान्त-मेखला-सु-शोभिनी, कराल-दंष्ट्र-भास्वरा सु-जिह्व-रक्त-रञ्जिता। महिष-दैत्य-मर्दिनी सुरेन्द्र-दुःख-भञ्जिनी, जयतु शैल-नन्दिनी शिवा-शवा-विहारिणी ||७|| नवाक्षर-मन्त्र-मयी त्रिनेत्र-तेज-दायिनी, कुलाकुल-स्वरूपिणी महा-विपत्ति-हारिणी। समस्त-सिद्ध-योगिनी गणेश्वर-प्रमोदिनी, भजामि दिव्य-पार्वतीं शिव-प्रिया-मनोहराम् ||८|| प्रफुल्ल-नील-पङ्कज-प्रपञ्च-कालिम-प्रभा- वलम्बि-कण्ठ-कन्दली-रुचि-प्रबद्ध-कन्धरम्। स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं गजाम्विका-वृषध्वजं नमामि शम्भु-सुन्दरीम् ||९|| क्वचिद्-दिगम्बरी-छटा-विचित्र-रूप-धारिणी, क्वचिद्-मृणाल-कोमला सु-पुष्प-हार-धारिणी। क्वचिद्-महा-भयङ्करा कराल-काल-रूपिणी, नमामि तां जगन्मयीं शिवा-सखीं सु-पावनीम् ||१०|| रणत् मृदङ्ग शङ्ख नाद घोर श ब्द मण्डिता, चलत् कपाल कुण्डला फणा मणि विभूषिता। धनु र्विमुक्त सायकैः सुरारि सैन्य दारिणी, प्रचण्ड चण्ड नन्दिनीं नमामि दैत्य हारिणीम् ||११|| नृमुण्ड माल मण्डिता विशीर्ण केस पाशिका, कराल लोल जिह्विका त्रिलोक त्रास नाशिनी। महा कपाल पात्र गा सु रक्त पान कारिणी, जयत्य मेघ सुन्दरी महा धमाधम ध्वनिः ||१२|| समस्त शक्ति चक्र गा सु बिन्दु मध्य वासिनी, षडब्ज भेदिनी मुदा महा सुषुम्न वाहिनी। महा प्रकाश पुञ्जिका शिव स्वरुप कारिणी, मनस्विनि नमोऽस्तुते प्रपन्न भक्त तारिणी ||१३|| अखण्ड शक्ति मण्डले सदैव काल कालिनी, विचित्र सृष्टि कारिणी सदा सु मङ्गल प्रदा। इदं हि नित्य मेव मुक्त मुत्तमोत्तमं स्तवं, पठन्न् स्मरन् ब्रुवन् नरो विशुद्धिमेति संततम् ||१४|| नमस्ते नमस्ते महा शक्ति रूपे, नमस्ते नमस्ते शिवे शान्त रूपे। नमस्ते नमस्ते जगद् व्याप्त देहे, नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते ||१५|| ————————————————————— ✍️ रचनाकार -- श्री बाल कृष्ण मिश्रा 🏠 स्थान -- नई दिल्ली 📲: 8700462852 📧 ई-मेल -- [email protected] Bal Krishna Mishra 🙏 _______________________________________ # भक्ति # Shri Parvati Shakti Tandav Stuti # Devotional
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Feb 25
Feb 25, 2026 at 11:56 PM UTC
|| श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति ✍️ ||
|| श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति ✍️ || || संस्कृत काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ || _______________________________________ कुचेल-केश-पाश-बद्ध-मल्लिका-सुगन्धिनी, उमेश-वाम-भाग-नित्य-केलि-कंज-धारिणी। अशोक-पुष्प-पल्लवैः सु-रञ्जित-स्व-मूर्धनी, करोतु शक्ति-ताण्डवं सदा शिवा भवानी ||१|| ललाट-बिन्दु-सिन्धु-रक्त-रञ्जिता-स्व-भालका, धनुर्धरा त्रिशूलिनी कपाल-पाश-धारिणी। कराल-काल-मर्दिनी समस्त-दुःख-हारिणी, नमामि शैल-पुत्रिणीं सदा शिवा भवानी ||२|| रणत्-क्वणत्-कणत्-किङ्किणी-नूपुर-घोष-मण्डिता, चलत्-चलत्-पद-क्रमैः सु-विश्व-चक्र-चालिनी। अघोर-रूप-धारिणी घोर-शत्रु-घातिनी, प्रचण्ड-शक्ति-रूपिणी सदा शिवा भवानी ||३|| जगज्जननी पावनी प्रसन्न-मन्द-हासिनी, सु-भक्त-वृन्द-वन्दिता समस्त-विघ्न-नाशिनी। प्रलय-वह्नि-रञ्जिता महानिभय-दायिनी, जयतु जयतु पार्वती सदा शिवा भवानी ||४|| जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्प-निर्झरी, विलोम-शक्ति-रूपिणी कराल-खड्ग-धारिणी। धगद्-धगद्-धगज्-ज्वलत्-ललाट-पट्ट-पावके, किशोर-चन्द्र-शेखरे रतिं प्रतिक्षणं मम ||५|| महा-विचित्र-नृत्त-नाद-डम्ब-डम्ब-डम्बिका, प्रचण्ड-मुण्ड-मण्डली-गले-विराज-मालिका। दश-दिगन्त-गामिनी सु-तेज-पुञ्ज-भासिनी, पुनातु माँ सदा-सदा उमा-महेश्वरी विभू ||६|| नितम्ब-चन्द्र-कान्ति-कान्त-मेखला-सु-शोभिनी, कराल-दंष्ट्र-भास्वरा सु-जिह्व-रक्त-रञ्जिता। महिष-दैत्य-मर्दिनी सुरेन्द्र-दुःख-भञ्जिनी, जयतु शैल-नन्दिनी शिवा-शवा-विहारिणी ||७|| नवाक्षर-मन्त्र-मयी त्रिनेत्र-तेज-दायिनी, कुलाकुल-स्वरूपिणी महा-विपत्ति-हारिणी। समस्त-सिद्ध-योगिनी गणेश्वर-प्रमोदिनी, भजामि दिव्य-पार्वतीं शिव-प्रिया-मनोहराम् ||८|| प्रफुल्ल-नील-पङ्कज-प्रपञ्च-कालिम-प्रभा- वलम्बि-कण्ठ-कन्दली-रुचि-प्रबद्ध-कन्धरम्। स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं गजाम्विका-वृषध्वजं नमामि शम्भु-सुन्दरीम् ||९|| क्वचिद्-दिगम्बरी-छटा-विचित्र-रूप-धारिणी, क्वचिद्-मृणाल-कोमला सु-पुष्प-हार-धारिणी। क्वचिद्-महा-भयङ्करा कराल-काल-रूपिणी, नमामि तां जगन्मयीं शिवा-सखीं सु-पावनीम् ||१०|| रणत् मृदङ्ग शङ्ख नाद घोर श ब्द मण्डिता, चलत् कपाल कुण्डला फणा मणि विभूषिता। धनु र्विमुक्त सायकैः सुरारि सैन्य दारिणी, प्रचण्ड चण्ड नन्दिनीं नमामि दैत्य हारिणीम् ||११|| नृमुण्ड माल मण्डिता विशीर्ण केस पाशिका, कराल लोल जिह्विका त्रिलोक त्रास नाशिनी। महा कपाल पात्र गा सु रक्त पान कारिणी, जयत्य मेघ सुन्दरी महा धमाधम ध्वनिः ||१२|| समस्त शक्ति चक्र गा सु बिन्दु मध्य वासिनी, षडब्ज भेदिनी मुदा महा सुषुम्न वाहिनी। महा प्रकाश पुञ्जिका शिव स्वरुप कारिणी, मनस्विनि नमोऽस्तुते प्रपन्न भक्त तारिणी ||१३|| अखण्ड शक्ति मण्डले सदैव काल कालिनी, विचित्र सृष्टि कारिणी सदा सु मङ्गल प्रदा। इदं हि नित्य मेव मुक्त मुत्तमोत्तमं स्तवं, पठन्न् स्मरन् ब्रुवन् नरो विशुद्धिमेति संततम् ||१४|| नमस्ते नमस्ते महा शक्ति रूपे, नमस्ते नमस्ते शिवे शान्त रूपे। नमस्ते नमस्ते जगद् व्याप्त देहे, नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते ||१५|| ————————————————————— ✍️ रचनाकार -- श्री बाल कृष्ण मिश्रा 🏠 स्थान -- नई दिल्ली 📲: 8700462852 📧 ई-मेल -- [email protected] Bal Krishna Mishra 🙏 _______________________________________ # भक्ति # Shri Parvati Shakti Tandav Stuti # Devotional
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|| दिव्य शक्ति तांडव ✍️ || || संस्कृत काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ || ___________________________________ सत सृष्टि तांडव रचयिता, सत्यं स्वरूपं, शिव शक्तिं, कल्याणं कारणं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः। नाट्यराजं, महाशक्ति, पार्वती कल्याणी, शुभंकारी, महाकाली, शक्ति तांडव नमो नमः॥१॥ ज्ञानं स्वरूपा, शक्ति रूपा, प्रेमं, शांति, अमृतं, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः। नृत्यं स्वरूपा, नृत्यं रूपा, नृत्यं, नृत्यं, नृत्यं, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः॥२॥ दिव्यं स्वरूपा, दिव्यं रूपा, दिव्यं, दिव्यं, दिव्यं, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः। शक्ति तांडव, शक्ति तांडव, शक्ति तांडव, शक्ति तांडव, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः॥३॥ ॐ नमः शिवायै च शिवायै च नमो नमः। ~बाल कृष्ण मिश्रा , नई दिल्ली |
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Feb 23
Feb 23, 2026 at 11:12 AM UTC
|| दिव्य शक्ति तांडव ||
|| दिव्य शक्ति तांडव ✍️ || || संस्कृत काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ || ___________________________________ सत सृष्टि तांडव रचयिता, सत्यं स्वरूपं, शिव शक्तिं, कल्याणं कारणं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः। नाट्यराजं, महाशक्ति, पार्वती कल्याणी, शुभंकारी, महाकाली, शक्ति तांडव नमो नमः॥१॥ ज्ञानं स्वरूपा, शक्ति रूपा, प्रेमं, शांति, अमृतं, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः। नृत्यं स्वरूपा, नृत्यं रूपा, नृत्यं, नृत्यं, नृत्यं, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः॥२॥ दिव्यं स्वरूपा, दिव्यं रूपा, दिव्यं, दिव्यं, दिव्यं, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः। शक्ति तांडव, शक्ति तांडव, शक्ति तांडव, शक्ति तांडव, अज्ञानं, विनाशं, दिव्यं, शक्ति तांडव नमो नमः॥३॥ ॐ नमः शिवायै च शिवायै च नमो नमः। ~बाल कृष्ण मिश्रा , नई दिल्ली |
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|| श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति ✍️ || || संस्कृत काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ || _______________________________________ कुचेल-केश-पाश-बद्ध-मल्लिका-सुगन्धिनी, उमेश-वाम-भाग-नित्य-केलि-कंज-धारिणी। अशोक-पुष्प-पल्लवैः सु-रञ्जित-स्व-मूर्धनी, करोतु शक्ति-ताण्डवं सदा शिवा भवानी ||१|| ललाट-बिन्दु-सिन्धु-रक्त-रञ्जिता-स्व-भालका, धनुर्धरा त्रिशूलिनी कपाल-पाश-धारिणी। कराल-काल-मर्दिनी समस्त-दुःख-हारिणी, नमामि शैल-पुत्रिणीं सदा शिवा भवानी ||२|| रणत्-क्वणत्-कणत्-किङ्किणी-नूपुर-घोष-मण्डिता, चलत्-चलत्-पद-क्रमैः सु-विश्व-चक्र-चालिनी। अघोर-रूप-धारिणी घोर-शत्रु-घातिनी, प्रचण्ड-शक्ति-रूपिणी सदा शिवा भवानी ||३|| जगज्जननी पावनी प्रसन्न-मन्द-हासिनी, सु-भक्त-वृन्द-वन्दिता समस्त-विघ्न-नाशिनी। प्रलय-वह्नि-रञ्जिता महानिभय-दायिनी, जयतु जयतु पार्वती सदा शिवा भवानी ||४|| जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्प-निर्झरी, विलोम-शक्ति-रूपिणी कराल-खड्ग-धारिणी। धगद्-धगद्-धगज्-ज्वलत्-ललाट-पट्ट-पावके, किशोर-चन्द्र-शेखरे रतिं प्रतिक्षणं मम ||५|| महा-विचित्र-नृत्त-नाद-डम्ब-डम्ब-डम्बिका, प्रचण्ड-मुण्ड-मण्डली-गले-विराज-मालिका। दश-दिगन्त-गामिनी सु-तेज-पुञ्ज-भासिनी, पुनातु माँ सदा-सदा उमा-महेश्वरी विभू ||६|| नितम्ब-चन्द्र-कान्ति-कान्त-मेखला-सु-शोभिनी, कराल-दंष्ट्र-भास्वरा सु-जिह्व-रक्त-रञ्जिता। महिष-दैत्य-मर्दिनी सुरेन्द्र-दुःख-भञ्जिनी, जयतु शैल-नन्दिनी शिवा-शवा-विहारिणी ||७|| नवाक्षर-मन्त्र-मयी त्रिनेत्र-तेज-दायिनी, कुलाकुल-स्वरूपिणी महा-विपत्ति-हारिणी। समस्त-सिद्ध-योगिनी गणेश्वर-प्रमोदिनी, भजामि दिव्य-पार्वतीं शिव-प्रिया-मनोहराम् ||८|| प्रफुल्ल-नील-पङ्कज-प्रपञ्च-कालिम-प्रभा- वलम्बि-कण्ठ-कन्दली-रुचि-प्रबद्ध-कन्धरम्। स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं गजाम्विका-वृषध्वजं नमामि शम्भु-सुन्दरीम् ||९|| क्वचिद्-दिगम्बरी-छटा-विचित्र-रूप-धारिणी, क्वचिद्-मृणाल-कोमला सु-पुष्प-हार-धारिणी। क्वचिद्-महा-भयङ्करा कराल-काल-रूपिणी, नमामि तां जगन्मयीं शिवा-सखीं सु-पावनीम् ||१०|| रणत् मृदङ्ग शङ्ख नाद घोर श ब्द मण्डिता, चलत् कपाल कुण्डला फणा मणि विभूषिता। धनु र्विमुक्त सायकैः सुरारि सैन्य दारिणी, प्रचण्ड चण्ड नन्दिनीं नमामि दैत्य हारिणीम् ||११|| नृमुण्ड माल मण्डिता विशीर्ण केस पाशिका, कराल लोल जिह्विका त्रिलोक त्रास नाशिनी। महा कपाल पात्र गा सु रक्त पान कारिणी, जयत्य मेघ सुन्दरी महा धमाधम ध्वनिः ||१२|| समस्त शक्ति चक्र गा सु बिन्दु मध्य वासिनी, षडब्ज भेदिनी मुदा महा सुषुम्न वाहिनी। महा प्रकाश पुञ्जिका शिव स्वरुप कारिणी, मनस्विनि नमोऽस्तुते प्रपन्न भक्त तारिणी ||१३|| अखण्ड शक्ति मण्डले सदैव काल कालिनी, विचित्र सृष्टि कारिणी सदा सु मङ्गल प्रदा। इदं हि नित्य मेव मुक्त मुत्तमोत्तमं स्तवं, पठन्न् स्मरन् ब्रुवन् नरो विशुद्धिमेति संततम् ||१४|| नमस्ते नमस्ते महा शक्ति रूपे, नमस्ते नमस्ते शिवे शान्त रूपे। नमस्ते नमस्ते जगद् व्याप्त देहे, नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते ||१५|| ————————————————————— ✍️ रचनाकार -- श्री बाल कृष्ण मिश्रा 🏠 स्थान -- नई दिल्ली 📲: 8700462852 📧 ई-मेल -- [email protected] Bal Krishna Mishra 🙏 _______________________________________ # भक्ति # Shri Parvati Shakti Tandav Stuti # Devotional
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Feb 23
Feb 23, 2026 at 11:12 AM UTC
|| श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति ✍️ ||
|| श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति ✍️ || || संस्कृत काव्य ✒️ || || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ || _______________________________________ कुचेल-केश-पाश-बद्ध-मल्लिका-सुगन्धिनी, उमेश-वाम-भाग-नित्य-केलि-कंज-धारिणी। अशोक-पुष्प-पल्लवैः सु-रञ्जित-स्व-मूर्धनी, करोतु शक्ति-ताण्डवं सदा शिवा भवानी ||१|| ललाट-बिन्दु-सिन्धु-रक्त-रञ्जिता-स्व-भालका, धनुर्धरा त्रिशूलिनी कपाल-पाश-धारिणी। कराल-काल-मर्दिनी समस्त-दुःख-हारिणी, नमामि शैल-पुत्रिणीं सदा शिवा भवानी ||२|| रणत्-क्वणत्-कणत्-किङ्किणी-नूपुर-घोष-मण्डिता, चलत्-चलत्-पद-क्रमैः सु-विश्व-चक्र-चालिनी। अघोर-रूप-धारिणी घोर-शत्रु-घातिनी, प्रचण्ड-शक्ति-रूपिणी सदा शिवा भवानी ||३|| जगज्जननी पावनी प्रसन्न-मन्द-हासिनी, सु-भक्त-वृन्द-वन्दिता समस्त-विघ्न-नाशिनी। प्रलय-वह्नि-रञ्जिता महानिभय-दायिनी, जयतु जयतु पार्वती सदा शिवा भवानी ||४|| जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्प-निर्झरी, विलोम-शक्ति-रूपिणी कराल-खड्ग-धारिणी। धगद्-धगद्-धगज्-ज्वलत्-ललाट-पट्ट-पावके, किशोर-चन्द्र-शेखरे रतिं प्रतिक्षणं मम ||५|| महा-विचित्र-नृत्त-नाद-डम्ब-डम्ब-डम्बिका, प्रचण्ड-मुण्ड-मण्डली-गले-विराज-मालिका। दश-दिगन्त-गामिनी सु-तेज-पुञ्ज-भासिनी, पुनातु माँ सदा-सदा उमा-महेश्वरी विभू ||६|| नितम्ब-चन्द्र-कान्ति-कान्त-मेखला-सु-शोभिनी, कराल-दंष्ट्र-भास्वरा सु-जिह्व-रक्त-रञ्जिता। महिष-दैत्य-मर्दिनी सुरेन्द्र-दुःख-भञ्जिनी, जयतु शैल-नन्दिनी शिवा-शवा-विहारिणी ||७|| नवाक्षर-मन्त्र-मयी त्रिनेत्र-तेज-दायिनी, कुलाकुल-स्वरूपिणी महा-विपत्ति-हारिणी। समस्त-सिद्ध-योगिनी गणेश्वर-प्रमोदिनी, भजामि दिव्य-पार्वतीं शिव-प्रिया-मनोहराम् ||८|| प्रफुल्ल-नील-पङ्कज-प्रपञ्च-कालिम-प्रभा- वलम्बि-कण्ठ-कन्दली-रुचि-प्रबद्ध-कन्धरम्। स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं गजाम्विका-वृषध्वजं नमामि शम्भु-सुन्दरीम् ||९|| क्वचिद्-दिगम्बरी-छटा-विचित्र-रूप-धारिणी, क्वचिद्-मृणाल-कोमला सु-पुष्प-हार-धारिणी। क्वचिद्-महा-भयङ्करा कराल-काल-रूपिणी, नमामि तां जगन्मयीं शिवा-सखीं सु-पावनीम् ||१०|| रणत् मृदङ्ग शङ्ख नाद घोर श ब्द मण्डिता, चलत् कपाल कुण्डला फणा मणि विभूषिता। धनु र्विमुक्त सायकैः सुरारि सैन्य दारिणी, प्रचण्ड चण्ड नन्दिनीं नमामि दैत्य हारिणीम् ||११|| नृमुण्ड माल मण्डिता विशीर्ण केस पाशिका, कराल लोल जिह्विका त्रिलोक त्रास नाशिनी। महा कपाल पात्र गा सु रक्त पान कारिणी, जयत्य मेघ सुन्दरी महा धमाधम ध्वनिः ||१२|| समस्त शक्ति चक्र गा सु बिन्दु मध्य वासिनी, षडब्ज भेदिनी मुदा महा सुषुम्न वाहिनी। महा प्रकाश पुञ्जिका शिव स्वरुप कारिणी, मनस्विनि नमोऽस्तुते प्रपन्न भक्त तारिणी ||१३|| अखण्ड शक्ति मण्डले सदैव काल कालिनी, विचित्र सृष्टि कारिणी सदा सु मङ्गल प्रदा। इदं हि नित्य मेव मुक्त मुत्तमोत्तमं स्तवं, पठन्न् स्मरन् ब्रुवन् नरो विशुद्धिमेति संततम् ||१४|| नमस्ते नमस्ते महा शक्ति रूपे, नमस्ते नमस्ते शिवे शान्त रूपे। नमस्ते नमस्ते जगद् व्याप्त देहे, नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते ||१५|| ————————————————————— ✍️ रचनाकार -- श्री बाल कृष्ण मिश्रा 🏠 स्थान -- नई दिल्ली 📲: 8700462852 📧 ई-मेल -- [email protected] Bal Krishna Mishra 🙏 _______________________________________ # भक्ति # Shri Parvati Shakti Tandav Stuti # Devotional
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।। शिव-शक्ति श्रृंगार ✍️।। || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ || ———————————————————— विराजमान भाल चंद्र, गंग धार मस्तकम्, प्रिये सुअंग गौरि वाम, शोभते सुहस्तकम्। सुगंध पुष्प माल कण्ठ, मुण्ड माल राजते, अनंत प्रेम रूप देखि, कामदेव लाजिते ॥१॥ ललाट नेत्र दग्ध काम, भस्म अंग लेपनम्, उमा विलोकि मुग्ध भाव, अर्पते सुजीवनम्। मृदंग ताल डमरूअं, निनाद व्योम गुंजते, सुरेश देव दानवा, सप्रेम पाद पूजते ॥२॥ सुवर्ण वर्ण शैलजा, कपूर गौर शंकरम्, विचित्र सौम्य रूप धार, मोहते चराचरम्। सुहाग भाग माँग बीच, सेंदुरं सुसोभितं, प्रसन्न चित्त देखि भक्त, होत मोद मोहितं ॥३॥ नगाधिराज पुत्रिका समक्ष देव देवताम्, अनन्त कोटि सृष्टिदां नमामि शक्ति रूपिणीम्। जटा कलाप मध्य बाल, चंद्रिका चकाचुपं, निहारि गौरि रूप सौम्य, भूलि जात आपुपं ॥४॥ झुलात प्रेम-दोलना हिमालयं सुशृंग में, अनंत रंग घोरि-घोरि भीजतें सुअंग में। न वर्ण्यते मुखेन शक्ति शम्भु दिव्य संगमं, हरंति ताप द्वन्द्व मोह मानसादि पंगमम् ॥५॥ कपोत पंख कंचुकी, सुवस्त्र धार शैलजा, प्रमथ समूह मध्य नाथ, त्यागि लोक सर्व जा। सुहास मंद ओष्ठ पै, सुमेरु धीर धारहीं, विलोकि भक्त विश्व के, कुपात्र कष्ट हारहीं ॥६॥ त्रिशूल डमरु हत्थ में, पिनाक चाप साजिते, विशाल व्याल कंठ में, अनूप रूप राजते। गले लिपट्टि कालिका, सदा सुहाग माँगती, दिगंबरं सुवास में, सुगन्ध प्रेम जागती ॥७॥ जहाँ विराग राग के, अनन्त तार मिल रहे, हृदय-कमल अनन्य के, प्रसन्न होइ खिल रहे। नमो नमो उमा-पति, नमो नमो गिरीश्वरी, करो कृपा सदैव ही, नमामि विश्व-ईश्वरी ॥ ८ ॥ ————————————————————— ✍️ रचनाकार -- श्री बाल कृष्ण मिश्रा 🏠 स्थान -- नई दिल्ली 📲: 8700462852 📧 ई-मेल -- [email protected] #Shiv Shakti Shringar #ShivratriVibes #शिवरात्रि
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Feb 15
Feb 15, 2026 at 2:18 AM UTC
।। शिव-शक्ति श्रृंगार ।।
।। शिव-शक्ति श्रृंगार ✍️।। || बाल कृष्ण मिश्रा ✒️ || ———————————————————— विराजमान भाल चंद्र, गंग धार मस्तकम्, प्रिये सुअंग गौरि वाम, शोभते सुहस्तकम्। सुगंध पुष्प माल कण्ठ, मुण्ड माल राजते, अनंत प्रेम रूप देखि, कामदेव लाजिते ॥१॥ ललाट नेत्र दग्ध काम, भस्म अंग लेपनम्, उमा विलोकि मुग्ध भाव, अर्पते सुजीवनम्। मृदंग ताल डमरूअं, निनाद व्योम गुंजते, सुरेश देव दानवा, सप्रेम पाद पूजते ॥२॥ सुवर्ण वर्ण शैलजा, कपूर गौर शंकरम्, विचित्र सौम्य रूप धार, मोहते चराचरम्। सुहाग भाग माँग बीच, सेंदुरं सुसोभितं, प्रसन्न चित्त देखि भक्त, होत मोद मोहितं ॥३॥ नगाधिराज पुत्रिका समक्ष देव देवताम्, अनन्त कोटि सृष्टिदां नमामि शक्ति रूपिणीम्। जटा कलाप मध्य बाल, चंद्रिका चकाचुपं, निहारि गौरि रूप सौम्य, भूलि जात आपुपं ॥४॥ झुलात प्रेम-दोलना हिमालयं सुशृंग में, अनंत रंग घोरि-घोरि भीजतें सुअंग में। न वर्ण्यते मुखेन शक्ति शम्भु दिव्य संगमं, हरंति ताप द्वन्द्व मोह मानसादि पंगमम् ॥५॥ कपोत पंख कंचुकी, सुवस्त्र धार शैलजा, प्रमथ समूह मध्य नाथ, त्यागि लोक सर्व जा। सुहास मंद ओष्ठ पै, सुमेरु धीर धारहीं, विलोकि भक्त विश्व के, कुपात्र कष्ट हारहीं ॥६॥ त्रिशूल डमरु हत्थ में, पिनाक चाप साजिते, विशाल व्याल कंठ में, अनूप रूप राजते। गले लिपट्टि कालिका, सदा सुहाग माँगती, दिगंबरं सुवास में, सुगन्ध प्रेम जागती ॥७॥ जहाँ विराग राग के, अनन्त तार मिल रहे, हृदय-कमल अनन्य के, प्रसन्न होइ खिल रहे। नमो नमो उमा-पति, नमो नमो गिरीश्वरी, करो कृपा सदैव ही, नमामि विश्व-ईश्वरी ॥ ८ ॥ ————————————————————— ✍️ रचनाकार -- श्री बाल कृष्ण मिश्रा 🏠 स्थान -- नई दिल्ली 📲: 8700462852 📧 ई-मेल -- [email protected] #Shiv Shakti Shringar #ShivratriVibes #शिवरात्रि
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🥀 || बालकृष्ण मिश्रा ✒️ || 🥀 || मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम ✒️ || ___________________________________ उगता सूरज तिलक लगाता उज्जवल चंद्र किरण की वर्षा , नतमस्तक तेरे चरणों में जिन चरणों में चारों धाम | मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || तेरी माटी शीतल चंदन , जिसमें खेले खुद रघुनन्दन । जिसमें कान्हा ने जन्म लिया , कभी खाई , कभी लेप किया । सीता की मर्यादा यहाँ , यहाँ मीरा का प्रेम | मन के दर्पण का तू दर्शन तेरे आँचल में संस्कृति का मान। मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || कल कल करती नदियां अपनी संगीत सुनाए। चू चू करती चिड़िया अपनी गीत सुनाए। मातृभूमि की पावन धरा , हर हृदय में प्रेम संजोए काशी विश्वनाथ की आरती, हर मन में दीप जलाए | आध्यात्म की गहराई यहाँ और विज्ञान की उड़ान | मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || दिव्य अलौकिक अजर अमर कंकर भी बन जाता यहाँ शंकर | बलिदानों की गाथा तू , तू वीरों की पहचान | जय-जय माँ भारती, जय यह पवित्र धरा महान मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || ___________________________________ ✍️ रचनाकार -- श्री बाल कृष्ण मिश्रा 🏠 स्थान -- नई दिल्ली 📧 ई-मेल -- [email protected]                   📱 चलभाष -- 8700462852          Bal Krishna Mishra ___________________________________
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Dec 27, 2025
Dec 27, 2025 at 2:05 PM UTC
|| मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम ✒️ ||
🥀 || बालकृष्ण मिश्रा ✒️ || 🥀 || मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम ✒️ || ___________________________________ उगता सूरज तिलक लगाता उज्जवल चंद्र किरण की वर्षा , नतमस्तक तेरे चरणों में जिन चरणों में चारों धाम | मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || तेरी माटी शीतल चंदन , जिसमें खेले खुद रघुनन्दन । जिसमें कान्हा ने जन्म लिया , कभी खाई , कभी लेप किया । सीता की मर्यादा यहाँ , यहाँ मीरा का प्रेम | मन के दर्पण का तू दर्शन तेरे आँचल में संस्कृति का मान। मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || कल कल करती नदियां अपनी संगीत सुनाए। चू चू करती चिड़िया अपनी गीत सुनाए। मातृभूमि की पावन धरा , हर हृदय में प्रेम संजोए काशी विश्वनाथ की आरती, हर मन में दीप जलाए | आध्यात्म की गहराई यहाँ और विज्ञान की उड़ान | मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || दिव्य अलौकिक अजर अमर कंकर भी बन जाता यहाँ शंकर | बलिदानों की गाथा तू , तू वीरों की पहचान | जय-जय माँ भारती, जय यह पवित्र धरा महान मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम || ___________________________________ ✍️ रचनाकार -- श्री बाल कृष्ण मिश्रा 🏠 स्थान -- नई दिल्ली 📧 ई-मेल -- [email protected]                   📱 चलभाष -- 8700462852          Bal Krishna Mishra ___________________________________
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सदाशिव शंकर महेश्वर महेश, परमेश्वर त्रिलोचन त्रयंबक त्रिनेत्र। ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, भव-भय हरन भोलेनाथ, जय जय शिव शंकराय॥ प्रचंड-तांडव-नृत्य-रत, दिगंबर-विश्वरूपम्, शून्य-हृदय-निवासी, पूर्ण-ब्रह्म-अनुपमम्। अनादि-अनंत-कालचक्र-अधिपति, महादेव-महंतम्, क्षण-भंगुर-लीलाधारी, विभु-अविनाशी-अनंतम्॥ जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्प-निर्झरी, शीश-शशांक-धवल-दीप्ति, अमृत-रस-झरी। व्याल-कराल-माल-कंठ, भस्म-विलेपन-धारी, वैराग्य-पुंज-महायोगी, त्रिपुर-अरि-विनाशकारी॥ त्रिशूल-धारिणी-शक्ति, न्याय-वज्र-प्रहारम्, डमरू-नाद-गुंजित-ब्रह्मांड, सृजन-स्वर-सारम्। महानाश-कुक्षि-स्थित, नूतन-सृष्टि-विधानम्, रुद्र-भीषण-संहार, शिव-सौम्य-निर्माणम्॥ काल-काल-महाकाल, काल-जयी-अनामी, चराचर-जगत-रक्षक, विश्वेश्वर-स्वामी। करुणा-पारावार-शंभू, तारन-तरन-हारी, शरण्य-चरण-कमल-अर्पित, जय-जय-पुरारी॥ ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, हर हर महादेव, जय शिव शंकराय॥ ~ बाल कृष्ण मिश्रा, नई दिल्ली | E-mail: [email protected]
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Dec 25, 2025
Dec 25, 2025 at 1:33 AM UTC
।। श्री महाकाल तांडव स्तुति ।।
सदाशिव शंकर महेश्वर महेश, परमेश्वर त्रिलोचन त्रयंबक त्रिनेत्र। ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, भव-भय हरन भोलेनाथ, जय जय शिव शंकराय॥ प्रचंड-तांडव-नृत्य-रत, दिगंबर-विश्वरूपम्, शून्य-हृदय-निवासी, पूर्ण-ब्रह्म-अनुपमम्। अनादि-अनंत-कालचक्र-अधिपति, महादेव-महंतम्, क्षण-भंगुर-लीलाधारी, विभु-अविनाशी-अनंतम्॥ जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्प-निर्झरी, शीश-शशांक-धवल-दीप्ति, अमृत-रस-झरी। व्याल-कराल-माल-कंठ, भस्म-विलेपन-धारी, वैराग्य-पुंज-महायोगी, त्रिपुर-अरि-विनाशकारी॥ त्रिशूल-धारिणी-शक्ति, न्याय-वज्र-प्रहारम्, डमरू-नाद-गुंजित-ब्रह्मांड, सृजन-स्वर-सारम्। महानाश-कुक्षि-स्थित, नूतन-सृष्टि-विधानम्, रुद्र-भीषण-संहार, शिव-सौम्य-निर्माणम्॥ काल-काल-महाकाल, काल-जयी-अनामी, चराचर-जगत-रक्षक, विश्वेश्वर-स्वामी। करुणा-पारावार-शंभू, तारन-तरन-हारी, शरण्य-चरण-कमल-अर्पित, जय-जय-पुरारी॥ ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, हर हर महादेव, जय शिव शंकराय॥ ~ बाल कृष्ण मिश्रा, नई दिल्ली | E-mail: [email protected]
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