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"jaswant" poems
मृदुला - जसवंत - यशु जान उनके नाम दो हैं रिश्ता एक है , एक का दिल पत्थर एक का नेक है , प्यार में लड़ाई लाज़मी है होनी , उबलते गुस्से से फ़िर निकलता सेक है , नाम के विपरीत हैं दोनों , करते बात हैं बड़े अदबों की , एक यश , कीर्ति को ढूंढे , दूसरा चाहे मिठास लफ़्ज़ों की , उनके नाम दो हैं रिश्ता एक है | रूठ जाते हैं , मान जाते हैं , लड़ते समय भूल पहचान जाते हैं , गुस्सा ठंडा हो तो तब याद आता , हम एक दुसरे पर ईमान लाते हैं , आँखें बंद कर पहचान लेते , आहट एक - दुसरे के क़दमों की , एक यश , कीर्ति को ढूंढे , दूसरा चाहे मिठास लफ़्ज़ों की , उनके नाम दो हैं रिश्ता एक है | इश्क़ में कोई , ज़ात - पात ना , अलग होने की अब करते बात ना , समझ है उनको साफ़ दिल वालों के , ढूंढने से भी मिलते हैं साथ ना , बात अलग ही होती यशु जान , इन इश्क़ के पाकीज़ा नग़्मों की , नाम के विपरीत हैं दोनों , करते बात हैं बड़े अदबों की , एक यश , कीर्ति को ढूंढे , दूसरा चाहे मिठास लफ़्ज़ों की , उनके नाम दो हैं रिश्ता एक है | मृदुला - जसवंत - यशु जान
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Jun 9, 2019
Jun 9, 2019 at 10:26 AM UTC
मृदुला जसवंत Mridula Jaswant
मृदुला - जसवंत - यशु जान उनके नाम दो हैं रिश्ता एक है , एक का दिल पत्थर एक का नेक है , प्यार में लड़ाई लाज़मी है होनी , उबलते गुस्से से फ़िर निकलता सेक है , नाम के विपरीत हैं दोनों , करते बात हैं बड़े अदबों की , एक यश , कीर्ति को ढूंढे , दूसरा चाहे मिठास लफ़्ज़ों की , उनके नाम दो हैं रिश्ता एक है | रूठ जाते हैं , मान जाते हैं , लड़ते समय भूल पहचान जाते हैं , गुस्सा ठंडा हो तो तब याद आता , हम एक दुसरे पर ईमान लाते हैं , आँखें बंद कर पहचान लेते , आहट एक - दुसरे के क़दमों की , एक यश , कीर्ति को ढूंढे , दूसरा चाहे मिठास लफ़्ज़ों की , उनके नाम दो हैं रिश्ता एक है | इश्क़ में कोई , ज़ात - पात ना , अलग होने की अब करते बात ना , समझ है उनको साफ़ दिल वालों के , ढूंढने से भी मिलते हैं साथ ना , बात अलग ही होती यशु जान , इन इश्क़ के पाकीज़ा नग़्मों की , नाम के विपरीत हैं दोनों , करते बात हैं बड़े अदबों की , एक यश , कीर्ति को ढूंढे , दूसरा चाहे मिठास लफ़्ज़ों की , उनके नाम दो हैं रिश्ता एक है | मृदुला - जसवंत - यशु जान
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