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#ravana
कार्य दूत का जो होता है अंगद ने अंजाम दिया , अपने स्वामी रामचंद्र के शक्ति का प्रमाण दिया। कार्य दूत का वही कृष्ण ले दुर्योधन के पास गए, जैसे कोई अर्णव उदधि खुद प्यासे अन्यास गए। जब रावण ने अंगद को वानर जैसा उपहास किया, तब कैसे वानर ने बल से रावण का परिहास किया। ज्ञानी रावण के विवेक पर दुर्बुद्धि अति भारी थी, दुर्योधन भी ज्ञान शून्य था सुबुद्धि मति मारी थी। ऐसा न था श्री कृष्ण की शक्ति अजय का ज्ञान नहीं , अभिमानी था मुर्ख नहीं कि हरि से था अंजान नहीं। कंस कहानी ज्ञात उसे भी मामा ने क्या काम किया, शिशुओं का हन्ता पापी उसने कैसा दुष्काम किया। जब पापों का संचय होता धर्म खड़ा होकर रोता था, मामा कंस का जय होता सत्य पुण्य क्षय खोता था। कृष्ण पक्ष के कृष्ण रात्रि में कृष्ण अति अँधियारे थे , तब विधर्मी कंस संहारक गिरिधर वहीं पधारे थे। जग के तारण हार श्याम को माता कैसे बचाती थी , आँखों में काजल का टीका धर आशीष दिलाती थी। और कान्हा भी लुकके छिपके माखन दही छुपाते थे , मिटटी को मुख में रखकर संपूर्ण ब्रह्मांड दिखाते थे। कभी गोपी के वस्त्र चुराकर मर्यादा के पाठ पढ़ाए, पांचाली के वस्त्र बढ़ाकर चीर हरण से उसे बचाए। इस जग को रचने वाले कभी कहलाये थे माखनचोर, कभी गोवर्धन पर्वत धारी कभी युद्ध तजते रणछोड़। अजय अमिताभ सुमन:सर्वाधिकार सुरक्षित
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May 23, 2021
May 23, 2021 at 1:21 AM UTC
दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-4
कार्य दूत का जो होता है अंगद ने अंजाम दिया , अपने स्वामी रामचंद्र के शक्ति का प्रमाण दिया। कार्य दूत का वही कृष्ण ले दुर्योधन के पास गए, जैसे कोई अर्णव उदधि खुद प्यासे अन्यास गए। जब रावण ने अंगद को वानर जैसा उपहास किया, तब कैसे वानर ने बल से रावण का परिहास किया। ज्ञानी रावण के विवेक पर दुर्बुद्धि अति भारी थी, दुर्योधन भी ज्ञान शून्य था सुबुद्धि मति मारी थी। ऐसा न था श्री कृष्ण की शक्ति अजय का ज्ञान नहीं , अभिमानी था मुर्ख नहीं कि हरि से था अंजान नहीं। कंस कहानी ज्ञात उसे भी मामा ने क्या काम किया, शिशुओं का हन्ता पापी उसने कैसा दुष्काम किया। जब पापों का संचय होता धर्म खड़ा होकर रोता था, मामा कंस का जय होता सत्य पुण्य क्षय खोता था। कृष्ण पक्ष के कृष्ण रात्रि में कृष्ण अति अँधियारे थे , तब विधर्मी कंस संहारक गिरिधर वहीं पधारे थे। जग के तारण हार श्याम को माता कैसे बचाती थी , आँखों में काजल का टीका धर आशीष दिलाती थी। और कान्हा भी लुकके छिपके माखन दही छुपाते थे , मिटटी को मुख में रखकर संपूर्ण ब्रह्मांड दिखाते थे। कभी गोपी के वस्त्र चुराकर मर्यादा के पाठ पढ़ाए, पांचाली के वस्त्र बढ़ाकर चीर हरण से उसे बचाए। इस जग को रचने वाले कभी कहलाये थे माखनचोर, कभी गोवर्धन पर्वत धारी कभी युद्ध तजते रणछोड़। अजय अमिताभ सुमन:सर्वाधिकार सुरक्षित
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The princess who chose To live in exile Holding the hand of her husband With a beautiful smile Framed in a guile by Ravan But she didn't fall in his wicked ways Despite being held captive And tortured for nights and days She refused to go with Hanuman When he came to rescue her Insisted that Rama come openly to defeat her captor In Rama's honor exile did she prefer On the Ravan's defeat - to prove her purity She had to walk through fire But the flames neither touched her body And nor her attire The fire bowed in her honor But that wasn't enough For the clouds of gloom Were towering above The world has never been fair to women Despite of proving her purity Sita had to leave It was the height of cruelty Cause Rama was as weak In the face of his men As strong he was In front of Ravan Rama- the man Sita loved enough to die for Asked her to leave To the path that led abhor Just imagine the way Sita would be looking at Rama With whom she had to part For he was standing dumb like a statue When her world was falling apart Would she have accused or looked down at him As she asked mother earth to swallow her She was going back to where she came from In order to save the last shred of her honor
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May 22, 2018
May 22, 2018 at 3:12 PM UTC
Sita