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खाना-ए-दिल आख़िर आबगाह क्यूँ बना हुआ है? होता है जो दुनियावी महफ़िल में, वही तो हुआ है! अकेलेपन की टीस, हिय के करुण रूदन से, दुनियावी अर्ज़मन्दों को, न ही फर्क़ पड़ा था, न ही फर्क़ पड़ा है। खिंच आते सभी तुम तक, आराइश देख महलों की, वही तो सूना छोड़ जाते, जब आजरदाह होता मन में॥ खाना-ए-दिल आख़िर आबगाह क्यूँ बना हुआ है? होता है जो दुनियावी महफ़िल में, वही तो हुआ है! तख़सीम है आब-ए-चश्म से वो जगह, जहां कभी आब-ए-आइना बिखरा हुआ था। आशुफ्ता है वो सांस मेरी, जिसमें कभी चैन समाया होता था॥ खाना-ए-दिल आख़िर आबगाह क्यूँ बना हुआ है? होता है जो दुनियावी महफ़िल में, वही तो हुआ है! ग़लती ऐसी क्या हुई, कि आश्ना-ए-दिल भी छोड़ चल दिये? सच्चा हूँ, ये ग़ुनाह है मेरा, या सीधा हूँ, ये बुराई है मेरी? या फिर ये कि आंसू नहीं देख सकता किसी कि आँखों में? या शायद ये कि तुम सी झूठी अदा ओढ़े नहीं चलता! या ये, कि मेरी जेब खाली है?? खाना-ए-दिल आख़िर आबगाह क्यूँ बना हुआ है? होता है जो दुनियावी महफ़िल में, वही तो हुआ है! अरे! ओ हुक्मरानों! मैं अकेला तो हूँ पर झूठा नहीं। तुम सा चांदी की थाली में तो नहीं खाता, पर भूखे कि छटपटाहट को समझता ज़रूर हूँ मैं। महंगे जवाहरात से तो नहीं सजतीं मेरी शामें, पर किसी के इक़बाल को इल्ताफ़ में भी नहीं बदलता मैं। होगा नाज़ तुम्हें अपने कोषागार की वृहदता पे, पर नाज़ करता इख्लास और अल्लाह पाक़ की इनायत पे मैं॥ खाना-ए-दिल आख़िर आबगाह क्यूँ बना हुआ है? होता है जो दुनियावी महफ़िल में, वही तो हुआ है! सुन लो झूठे रईसों!!! ज़रूरत नहीं है तुम्हारे दोमुँहे इल्तिफ़ात की मुझे, आलियों के आली अकबर खुदा मेरे साथ है। और ये जो डराता हुआ अकेलापन है मेरा, तुम्हारे झूठे इब्तिसाम से तो लाख़ गुना बेहतर है। रखे रहो झूठी विलासिता अपने पास मुबारक, मुझे मेरी गरीबी इससे प्यारी है। पोंछते जाउंगा आँसू, बांटते जाउंगा ख़ुशियाँ, चाहे तुम हो या कोई और, क्यूंकि दुःख और अकेलापन, क्या होता है, कोई मुझसे पूछे, कोई मुझसे पूछे!!!!
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Aug 19, 2014
Aug 19, 2014 at 1:30 PM UTC
अंजुमन-ए-दिल की आवाज़
खाना-ए-दिल आख़िर आबगाह क्यूँ बना हुआ है? होता है जो दुनियावी महफ़िल में, वही तो हुआ है! अकेलेपन की टीस, हिय के करुण रूदन से, दुनियावी अर्ज़मन्दों को, न ही फर्क़ पड़ा था, न ही फर्क़ पड़ा है। खिंच आते सभी तुम तक, आराइश देख महलों की, वही तो सूना छोड़ जाते, जब आजरदाह होता मन में॥ खाना-ए-दिल आख़िर आबगाह क्यूँ बना हुआ है? होता है जो दुनियावी महफ़िल में, वही तो हुआ है! तख़सीम है आब-ए-चश्म से वो जगह, जहां कभी आब-ए-आइना बिखरा हुआ था। आशुफ्ता है वो सांस मेरी, जिसमें कभी चैन समाया होता था॥ खाना-ए-दिल आख़िर आबगाह क्यूँ बना हुआ है? होता है जो दुनियावी महफ़िल में, वही तो हुआ है! ग़लती ऐसी क्या हुई, कि आश्ना-ए-दिल भी छोड़ चल दिये? सच्चा हूँ, ये ग़ुनाह है मेरा, या सीधा हूँ, ये बुराई है मेरी? या फिर ये कि आंसू नहीं देख सकता किसी कि आँखों में? या शायद ये कि तुम सी झूठी अदा ओढ़े नहीं चलता! या ये, कि मेरी जेब खाली है?? खाना-ए-दिल आख़िर आबगाह क्यूँ बना हुआ है? होता है जो दुनियावी महफ़िल में, वही तो हुआ है! अरे! ओ हुक्मरानों! मैं अकेला तो हूँ पर झूठा नहीं। तुम सा चांदी की थाली में तो नहीं खाता, पर भूखे कि छटपटाहट को समझता ज़रूर हूँ मैं। महंगे जवाहरात से तो नहीं सजतीं मेरी शामें, पर किसी के इक़बाल को इल्ताफ़ में भी नहीं बदलता मैं। होगा नाज़ तुम्हें अपने कोषागार की वृहदता पे, पर नाज़ करता इख्लास और अल्लाह पाक़ की इनायत पे मैं॥ खाना-ए-दिल आख़िर आबगाह क्यूँ बना हुआ है? होता है जो दुनियावी महफ़िल में, वही तो हुआ है! सुन लो झूठे रईसों!!! ज़रूरत नहीं है तुम्हारे दोमुँहे इल्तिफ़ात की मुझे, आलियों के आली अकबर खुदा मेरे साथ है। और ये जो डराता हुआ अकेलापन है मेरा, तुम्हारे झूठे इब्तिसाम से तो लाख़ गुना बेहतर है। रखे रहो झूठी विलासिता अपने पास मुबारक, मुझे मेरी गरीबी इससे प्यारी है। पोंछते जाउंगा आँसू, बांटते जाउंगा ख़ुशियाँ, चाहे तुम हो या कोई और, क्यूंकि दुःख और अकेलापन, क्या होता है, कोई मुझसे पूछे, कोई मुझसे पूछे!!!!
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Silently you keep on walking fast Bursting like bubbles that dont exist You come and disappear like a shooting star Tilt in directions against all my will Slips from my hand like desert sands You Affect the life of a million men Like a gentle raindrop falling down You make my past look dull and brown You wont stop for anyone For moon or stars or for us none Look our time has just begun Livin in its moment is what makes it fun You have the power of almighty god To paint a rainbow or set a sun To give a birth and make him run Or take a life and give him peace You are the necessity of all our needs You start an evolution or make it seize You are the witness of our ugly wars Or our long everlasting history You wont stop for anyone For moon or stars or for us none Look our time has just begun Livin in its moment is what makes it fun You act like a rollercoaster giving me thrills Cant stop keeping an account of our daily bills You run fast while my warm gentle kiss Wont you care for my grief or bliss? Time my friend is your standard for To keep a check on these endless hours And I wish all will spend it wise It cant be brought back like a melting ice
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Jul 15, 2015
Jul 15, 2015 at 1:58 AM UTC
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