#myexperiences
हर बार घेरा गया,
कभी छल से, कभी प्रेम की छाया से,
पर निकल आया सदैव ही उस अभिमन्यु की भाँति,
इस छल के रण से, अपनी उस आंतरिक माया से।।
कई वाक्या फरमाए गए,
वो लम्हे जो मुझे मंजूर नहीं।
होना तो था घटित उनको,
पर यूँ एक साथ उनका हो जाना,
और करने वाले का नजरिया
मुझे भाया नहीं।।
थका तो मैं किंचित भी नहीं,
पर कुछ अटकलें जिनसे
मेरे मन को कचोटना—मुझे रास आया नहीं।
त्वरित वेग से दूँ जवाब हर एक बात का,
पर ये मूल के साथ ब्याज
कभी चाहा नहीं।।
अनदेखा तो नहीं किया,
लेकिन फिर कुछ—
इससे ज्यादा मैंने देखना चाहा नहीं।
मुझे पूर्ण विश्वास उस ऊपर वाले पर,
जिसने सदैव मुझे इन लोगों से बचाया।।
इस संघर्ष की धूमिल पगडंडी पर
चलता आया अकेला ही,
इसलिए चलना किसी के साथ
मुझे आया नहीं।
सत्य को सत्य कहा
यूँ हर किसी की तरह,
सत्य को कभी झुठलाना
मुझे आया नहीं।
हक के लिए जुबान भी न खोले कोई,
फिर क्या मूक रहना
हमें आया नहीं।।
हर शक्श याद मुझे—
बस दिखाया नहीं।
कभी वक्त को दी जाएगी
गवाही इनकी,
तभी तो अबतलक
इनको भुलाया नहीं।।
मैं भी वाक़िफ उस वक्त से,
जो सब प्रत्यक्ष लाया करता है,
इसलिए ही तो
ये खोना-पाना मैंने जताया नहीं।
ये किन्तु-परन्तु
तो कभी जीवन में लाया नहीं।।
हर फैसला लिया त्वरित,
जो सिर्फ मेरा—
कोई पराया नहीं।
फिर कभी आज़माने की
कोशिश भी न करना,
जो भी किया
वो कभी फिर दोहराया नहीं।।
Nov 26, 2025
Nov 26, 2025 at 11:36 PM UTC