#mahabharataduryodhanmythology
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भीम के हाथों मदकल,
अश्वत्थामा मृत पड़ा,
धर्मराज ने झूठ कहा,
मानव या कि गज मृत पड़ा।
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और कृष्ण ने उसी वक्त पर ,
पाञ्चजन्य बजाया था,
गुरु द्रोण को धर्मराज ने ,
ना कोई सत्य बताया था।
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अर्द्धसत्य भी असत्य से ,
तब घातक बन जाता है,
धर्मराज जैसों की वाणी से ,
जब छन कर आता है।
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युद्धिष्ठिर के अर्द्धसत्य को ,
गुरु द्रोण ने सच माना,
प्रेम पुत्र से करते थे कितना ,
जग ने ये पहचाना।
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होता ना विश्वास कदाचित ,
अश्वत्थामा मृत पड़ा,
प्राणों से भी जो था प्यारा ,
यमहाथों अधिकृत पड़ा।
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मान पुत्र को मृत द्रोण का ,
नाता जग से छूटा था,
अस्त्र शस्त्र त्यागे थे वो ना ,
जाने सब ये झूठा था।
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अगर पुत्र इस धरती पे ना ,
युद्ध जीतकर क्या होगा,
जीवन का भी मतलब कैसा ,
हारजीत का क्या होगा?
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यम के द्वारे हीं जाकर किंचित ,
मैं फिर मिल पाऊँगा,
शस्त्र त्याग कर बैठे शायद ,
मर कामिल हो पाऊँगा।
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धृष्टदयुम्न के हाथों ने फिर ,
कैसा वो दुष्कर्म रचा,
गुरु द्रोण को वधने में ,
नयनों में ना कोई शर्म बचा।
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शस्त्रहीन ध्यानस्थ द्रोण का ,
मस्तकमर्दन कर छल से,
पूर्ण किया था कर्म असंभव ,
ना कर पाता जो बल से।
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अजय अमिताभ सुमन
सर्वाधिकार सुरक्षित
May 15, 2022
May 15, 2022 at 4:59 AM UTC
जिस मानव का सिद्ध मनोरथ
मृत्यु क्षण होता संभव,
उस मानव का हृदय आप्त ना
हो होता ये असंभव।
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ना जाने किस भाँति आखिर
पूण्य रचा इन हाथों ने ,
कर्ण भीष्म न कर पाए वो
कर्म रचा निज हाथों ने।
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मुझको भी विश्वास ना होता
है पर सच बतलाता हूँ,
जिसकी चिर प्रतीक्षा थी
तुमको वो बात सुनाता हूँ।
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तुमसे पहले तेरे शत्रु का
शीश विच्छेदन कर धड़ से,
कटे मुंड अर्पित करता हूँ,
अधम शत्रु का निजकर से।
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सुन मित्र की बातें दुर्योधन के
मुख पे मुस्कान फली,
मनो वांछित सुनने को हीं
किंचित उसमें थी जान बची।
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कैसी भी थी काया उसकी
कैसी भी वो जीर्ण बची ,
पर मन के अंतर तम में तो
अभिलाषा कुछ क्षीण बची।
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क्या कर सकता अश्वत्थामा
कुरु कुंवर को ज्ञात रहा,
कैसे कैसे अस्त्र शस्त्र
अश्वत्थामा को प्राप्त रहा।
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उभर चले थे मानस पट पे
दृश्य कैसे ना मन माने ,
गुरु द्रोण के वधने में क्या
धर्म हुआ था सब जाने।
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लाख बुरा था दुर्योधन पर
सच पे ना अभिमान रहा ,
धर्मराज सा सच पे सच में
ना इतना सम्मान रहा।
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जो छलता था दुर्योधन पर
ताल थोक कर हँस हँस के,
छला गया छलिया के जाले
में उस दिन फँस फँस के।
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अजय अमिताभ सुमन
सर्वाधिकार सुरक्षित
May 1, 2022
May 1, 2022 at 12:54 AM UTC