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#kavitayen
आज़ादी तोह हमें मिल गयी है अंग्रेज़ो से, अब अपनो से बगावत का वक़्त आ चला हैं, मुख पे झूठी हँसी और आँसू पीके घटकने का आज अंतिम क्षण आ गया हैं, चोटें बोहत हैं शरीर पे, पर दिल पे लगी इस चोट पे मल्हम लगाने का समय अब आया हैं, चूँ ना निकलती मेरे मुँह से, पर अब अपने लिए खड़े होने और इंसाफ की लड़ाई लड़ने का युग आगया हैं, चूड़ियों में बंधी बेड़ियो को तोड़ने का ऐतिहासिक कल अब शुरू हो चुका हैं ।।
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Aug 16, 2020
Aug 16, 2020 at 5:03 PM UTC
आज़ादी
मेरे आसूँ सुक गए और तेरी यादें गीली भी ना हुई ।।
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Aug 9, 2020
Aug 9, 2020 at 4:52 PM UTC
यादें ।।
Tere kadam kya padhe dwar pe, Tanhai ne toh hume bewafaa karaar kar diya..
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Aug 7, 2020
Aug 7, 2020 at 3:23 AM UTC
Tanhaii
Afraid, Afraid if someone will know my inner side, undress my soul and uncover my scary wounds.
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Aug 4, 2020
Aug 4, 2020 at 4:22 PM UTC
Me
I wish to retire from this one sided love story..
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Aug 3, 2020
Aug 3, 2020 at 12:27 PM UTC
I wish..
मेरे जग की सुन्दरता तोह तेरी अखां विच बसी है, गरजने पे में सहमुन, तेरे बरसने पे मैं तेरे साथ झुमलूँ, ओर खिलखिलाने पे एकदम सूरजमुखी की तरह खिल उठूँ, मेरे जग की सुन्दरता तोह तेरी अखां विच बसी है ।।
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Aug 1, 2020
Aug 1, 2020 at 6:31 AM UTC
मेरा जग ।।
घर वो जहाँ रूह को सुकून मिलें , वो सुकून मुझे तेरी बाहों में मिलता है ।।
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Jul 31, 2020
Jul 31, 2020 at 1:24 PM UTC
घर ।।
गणीत में बड़ा कच्चा है तू, मेरी प्यार की गहराई को कभी नाप ही ना पाया।
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Jul 30, 2020
Jul 30, 2020 at 11:02 AM UTC
गहराइयाँ ।।
चलते रहो और आगे बढ़ो, तोह बस हम भी चल पड़े, अपनी रूह की तलाश में, पहाड़ो पे चल दिये, नदिया किनारे पे बैठ लिए, जहन दो पल सुकून, हर वो जगह पे चल दिये, यह पीड़ा, यह चोट जोह लगी ह इस रूह पे, इस एहसास को मिटाने की हमारी यह लाखों कोशिशें जोह ठहरी , उझाला भी अंधकार है, रोशनी की तड़प में जतपटाते से चल दिये, आंखें जैसे बटन की तरह खुली, बन्द करने पे मौत और खुली रहे तोह अन्धकार, जाऊ कहाँ बताओ ज़रा, हर पल सलाह देने वाली मंडली का पत्ता ही बता दो ज़रा, पूछेंगे उनसे हमारी रूह का पता, टोटके तोह बताएं कैसे करूँ इससे रिहा , कहलेंगे इस रूह को रो भी लो ज़रा, फुट फुट के रोयेगी, इस घुटन के फांदें को तोड़ेगी, मलहम लगाएंगे उन गहरी चोट पे , प्यार से सिरहेँगे, सुकून की लोरी जोह गाएंगे, बिछड़े हुई साथी को फिरसे जीना सिखाएंगे।।
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Jul 29, 2020
Jul 29, 2020 at 1:13 PM UTC
आगे बढ़ो ।।
चलते रहो और आगे बढ़ो, तोह बस हम भी चल पड़े, अपनी रूह की तलाश में, पहाड़ो पे चल दिये, नदिया किनारे पे बैठ लिए, जहन दो पल सुकून, हर वो जगह पे चल दिये, यह पीड़ा, यह चोट जोह लगी ह इस रूह पे, इस एहसास को मिटाने की हमारी यह लाखों कोशिशें जोह ठहरी , उझाला भी अंधकार है, रोशनी की तड़प में जतपटाते से चल दिये, आंखें जैसे बटन की तरह खुली, बन्द करने पे मौत और खुली रहे तोह अन्धकार, जाऊ कहाँ बताओ ज़रा, हर पल सलाह देने वाली मंडली का पत्ता ही बता दो ज़रा, पूछेंगे उनसे हमारी रूह का पता, टोटके तोह बताएं कैसे करूँ इससे रिहा , कहलेंगे इस रूह को रो भी लो ज़रा, फुट फुट के रोयेगी, इस घुटन के फांदें को तोड़ेगी, मलहम लगाएंगे उन गहरी चोट पे , प्यार से सिरहेँगे, सुकून की लोरी जोह गाएंगे, बिछड़े हुई साथी को फिरसे जीना सिखाएंगे।।
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