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#freedomfighter
स्वतंत्रता का नवल पौधा, रक्त से निज सींचकर। था बचाया देश अपना, धर कफन तब शीश पर। ............. मिट ना जाए ये वतन कहीं , दुश्मनों की फौज से। चढ़ गए फाँसी के फंदे , पर बड़े हीं मौज से। ............... आज ऐसा दौर आया, देश जानता नहीं। मिट गए थे जो वतन पे, पहचानता नहीं। ................ सोचता हूँ  देश पर क्यों , मिट गए क्या सोचकर। आखिर उनको दे रहा क्या, देश बस अफसोस कर। ................. अजय अमिताभ सुमन: सर्वाधिकार सुरक्षित
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Mar 26, 2022
Mar 26, 2022 at 9:04 PM UTC
अफसोस शहीदों का