#freedomfighter
स्वतंत्रता का नवल पौधा,
रक्त से निज सींचकर।
था बचाया देश अपना,
धर कफन तब शीश पर।
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मिट ना जाए ये वतन कहीं ,
दुश्मनों की फौज से।
चढ़ गए फाँसी के फंदे ,
पर बड़े हीं मौज से।
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आज ऐसा दौर आया,
देश जानता नहीं।
मिट गए थे जो वतन पे,
पहचानता नहीं।
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सोचता हूँ देश पर क्यों ,
मिट गए क्या सोचकर।
आखिर उनको दे रहा क्या,
देश बस अफसोस कर।
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अजय अमिताभ सुमन:
सर्वाधिकार सुरक्षित
Mar 26, 2022
Mar 26, 2022 at 9:04 PM UTC