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========= वाह भैया क्या बात हो गए, अखबार-ए-सरताज हो गए। कल तक भईया फूलचंद थे, आज हातिम के बाप हो गए। ========= गढ्ढे में हीं रोड पड़ा था, पानी बदबू सड़ा पड़ा था, नाली से पानी जो बहता , सड़कों पे सलता हीं रहता। ========== चलना मुश्किल हुआ बड़ा था, भईया को ना फिक्र पड़ा था। नाक दबा के भईया चलते, पानी से बच बच कर रहते। ========== पर चुनाव के दिन जब आते, कचड़े भईया के मन भाते, टोपी धर सर हाथ कुदाल , जर्नलिस्ट लाते तत्काल । ========== झाड़ू वाड़ू लगा लगा के, कूड़े कचड़े हटा हटा के, खुर्पी वुर्पी चला चला के, ठीक पोज़ में दिखा दिखा के। ========== फ़ोटो खूब खिचाते भईया, सबपे छा जाते तब भईया, पंद्रह लाख दे देंगे पैसे , फ्री वाई फाई के हीं जैसे, ========== रोजगार की बातें करते, झाड़ू जाके चौक लगाते। वादे कर आते फिर ऐसे, जनता के मन भाते वैसे। ========== अपने मन की बात बताते, अखबारों में न्यूज़ छपाते । सपने सब्ज दिखलाते भईया , जनता को भरमाते भईया, ========== अच्छे हैं भईया जतलाकर , पार्टी को ये सब दिखलाकर। जन प्रत्याशी खास हो गए, वाह भैया क्या बात हो गए। =========== अखबार-ए-सरताज हो गए, कल तक भईया फूलचंद थे, आज हातिम के बाप हो गए, वाह भैया क्या बात हो गए। =========== अजय अमिताभ सुमन: सर्वाधिकार सुरक्षित
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May 8, 2022
May 8, 2022 at 1:16 AM UTC
अखबार ए खास
========= वाह भैया क्या बात हो गए, अखबार-ए-सरताज हो गए। कल तक भईया फूलचंद थे, आज हातिम के बाप हो गए। ========= गढ्ढे में हीं रोड पड़ा था, पानी बदबू सड़ा पड़ा था, नाली से पानी जो बहता , सड़कों पे सलता हीं रहता। ========== चलना मुश्किल हुआ बड़ा था, भईया को ना फिक्र पड़ा था। नाक दबा के भईया चलते, पानी से बच बच कर रहते। ========== पर चुनाव के दिन जब आते, कचड़े भईया के मन भाते, टोपी धर सर हाथ कुदाल , जर्नलिस्ट लाते तत्काल । ========== झाड़ू वाड़ू लगा लगा के, कूड़े कचड़े हटा हटा के, खुर्पी वुर्पी चला चला के, ठीक पोज़ में दिखा दिखा के। ========== फ़ोटो खूब खिचाते भईया, सबपे छा जाते तब भईया, पंद्रह लाख दे देंगे पैसे , फ्री वाई फाई के हीं जैसे, ========== रोजगार की बातें करते, झाड़ू जाके चौक लगाते। वादे कर आते फिर ऐसे, जनता के मन भाते वैसे। ========== अपने मन की बात बताते, अखबारों में न्यूज़ छपाते । सपने सब्ज दिखलाते भईया , जनता को भरमाते भईया, ========== अच्छे हैं भईया जतलाकर , पार्टी को ये सब दिखलाकर। जन प्रत्याशी खास हो गए, वाह भैया क्या बात हो गए। =========== अखबार-ए-सरताज हो गए, कल तक भईया फूलचंद थे, आज हातिम के बाप हो गए, वाह भैया क्या बात हो गए। =========== अजय अमिताभ सुमन: सर्वाधिकार सुरक्षित
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