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Megha Thakur Jul 9
थोड़ी अलग सी हैं मेरी कहानी,
कुछ सुनाई हैं तुम्हें,
कुछ बाकी हैं सुनानी।
माना इसका कोई अन्त नहीं फिर भी मुकम्मल हैं मेरी कहानी,
जो जी रहीं हूँ वो मेरी हैं,
और जो भूला दी वो थीं अंजानी।
ना कोई मकसद हैं इसका ना कोई सीख हैं मेरी कहानी,
बस इतना जानती हूँ के कभी बेपरवाह,
तों कभी हैं ये रूहानी।
- मेघा ठाकुर
Megha Thakur Jul 4
अक्सर जिन्हें खोने के नाम से ही रूह कांप उठती थी,
आज देखों अरसे बीत गए उनसे बात किए।
जिनके चेहरे से दिन की शुरुआत होती थीं,
आज शाम ढल गई बिना उनका नाम लिए।
जो सिर्फ़ अपने मतलब के लिए हमें मरने देने को तैयार थें,
आज सोचते हैं कैसे हम उनके साथ जीए।
कभी सोचा था ये उम्र भर का साथ हैं,
और रिश्ते के नाम पर वो सारे धोखे सहे जो तुमने दिये।
उन्हें खुशियाँ देकर,
सारे ग़म हमनें पियें।
खुद भी जख्मी थें हम,
मगर अपने जख्म छोड़ तेरे घाव हमने सियें।
-Megha Thakur
Megha Thakur Jul 3
Tu ek khubsurat dhokha hai kadwi sahi par sachayi to maut hai,
Fir bhi mai tujhe hi chahta hu.

Aye zindgi na jane kyu,
Mai tujhe baar baar manata hu.

Apna har ek pal har ek lamha,
Dil khol kar jita jata hu.

Tujhse hai pyar beshumar,
Ye tujhe bina hichkichaahat btata hu.

Apni har galti se,
Mai kuch naya sikhta jata hu.

Ek tere karib ane ke khatir,
Apni har burayi ko dur bhagata hu.

Tere dil me jagah banane ke liye,
Kayi dafaa mai ghut bhi jata hu.

Kaise btau tujhe aye zindgi,
Ki mai tujhe kitna chahta hu.
-Megha Thakur

— The End —