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 Sep 28 Raj Bhandari
Rashmi
भीड़ में ऐसी खोई हूं
खुद कि पहचान खोती जा रही हूं
रातों को जागना राहत देता है
अकेलापन कुछ ज्यादा ही करीब आ रहा है
शायद"अकेले रहना है मुझे"
मेरी इस ज़िद ने अकेला रखा है मुझे
फिर भी बहुत कुछ अधूरा सा लगता है
अभी बहुत से सपने है इस दिल मै
उन्हें पूरा करने के हीमत हर बार जुटाती हूं
फिर न जाने जवाने की या अपनी ही
ठोकर से उस हिम्मत के पहाड़ को गिरा देती हूं
दिखाती  हूं सबको की बहुत हिम्मत है मुझमें
न जाने किस्से ये झूठ कहती हूं
सब से,दूसरो से या फिर सब मै शामिल खुद से
न जाने क्या चाहती हूं
खुद से ही खुद को खोती जा रही हूं
अपने आप को खुद ही नई समझ रही हूं
ऑरो से फिर कैसी उम्मीद रखू
जब खुद मेरा मन ही नई जनता क्या चाहता है वो
थक चुकी हूं दुनिया से
पर अब शायद खुद से हार रही हूं मै
फिर भी हर रोज़ उठती हूं
सबसे पहले खुद से मुक़ाबला करने की हिम्मत लाती हूं
फिर बस अपने बिस्तर को छोरकर
दुनिया का रोज़ सामना करती हूं
पर जिस दिन खुद से हारू न
उस दिन हार जाती हूं सब से
तो हर रोज़ अपने आप को हराने मै वक्त बिताती हूं
इसलिए भी शायद खुद को कहीं खोती जा रही हूं।
Most green is ebbing away,
Only to reveal true colors
The red and the yellows,
They brighten my day

The green wicked witch
Hid her true colors,
Using hate and powers
Never had time to switch

Have you seen the bravery?
Have you seen the love
It's not trendy or it's unsavory
It's all hidden, thereof

Words are dancing aleatory
No one  jumps so high to catch them
They prefer an allegory
Using words they get from scrum.
Swaying with the wind,
It got the branch you held so tight
Spooled around your arm
You grabbed the nearest branch
When you weren't ready to fall.
Now, you look confused
It's been years
And you're hanging like that.
Bored by routines
Being at the mercy
Of traveling birds
When they want to say hello…
You can always grab another branch
Or you could just let go
You're ready to fall
You just  know
You'll land on your two feet
'Cause enough is enough.
 Sep 23 Raj Bhandari
Me
Voices of doubt plaguing you
giving you a fearful time
voices that sip out of fearful cups and push them
over to you cause they don t
want-

Overwrite their tone
Dear, do not
make it yours
 Sep 17 Raj Bhandari
Godawan
अभियंता का चिंतन
ड्राइंग पर आता
ड्राइंग से डिजाइन बनाता
डिजाइन जब फील्ड पर आती
इसमें मानवता की कड़ी जुड़ती
यहीं से अभियंता की
प्राथमिकताएं शुरू होती।

अभियंता एक सच्चा धर्मनिरपेक्ष
उसका उद्देश्य मानवता सापेक्ष
चाहे हो अमेरिका , चाहे ईरान
मापन उसका सब जगह समान
यही है उसका धर्म - ईमान।

अभियंता का जुनून
धरती, आकाश और सागर
देखते ही देखते उसने
सब जगह बना ली डगर
वास्तविकताएं उससे
छुप नहीं सकती पल भर
यहीं से वह बन जाता
एक मशीन भर
चेतना में शामिल
हो जाती है दक्षता हर

खाना ,पीना ,रहना
इनसे ना कोई परहेज
पहाड़- मैदान, समुद्र
बन जाता है उसका घर
शाकाहारी , मांसाहारी जो
मिल जाए उस पर निर्भर
अभियंता है पूरा वैश्विक
जहां मिले रुचिकर काम
वहीं बन जाता नागरिक
आज अभियंता दिवस है
stuck in my head
I cant tell if you
love me
or want me dead
doesn't matter, your in my head
your loves so sweet
but your oh so mean
blood on my hands
looking at me
like you don't know who I am
way to drunk to stand
now I'm crashing
but I know I'll land
right back in your hands
be like a bee
an inspiration sea
make your panache buzz.

© Mrunalini.D.Nimbalkar
#08.09.2019#
bee's are an example for how relentlessly they are busy collecting nector similarly we should be busy making a positive mark in our lives and the lives of others.simple modern haiku.
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