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Jan 19
दिखने जैसा कुछ नहीं... दिखाने जैसा कुछ नहीं
यहाँ कहने जैसा कुछ नहीं... बताने जैसा कुछ नहीं

हर्ज़ इस बात से नहीं की... कौन कितना जानता है
हाँ समझने जैसा कुछ नहीं... समझाने जैसा कुछ नहीं

बात-बात पे हर कोई... यहाँ अपना रोना रोता है
मेरा सुनने जैसा कुछ नहीं... सुनाने जैसा कुछ नहीं

इक मूद्दत पहले मुझे... हर शख़्स मुकम्मल याद था
अब भूलने जैसा कुछ नहीं... भूलाने जैसा कुछ नहीं

उस दौर में कभी कोई... हमारा भी हुआ करता था
अब अपने जैसा कुछ नहीं... अपनाने जैसा कुछ नहीं

दिखने जैसा कुछ नहीं... दिखाने जैसा कुछ नहीं
यहाँ कहने जैसा कुछ नहीं... बताने जैसा कुछ नहीं.
Written by
Paras Sharma  28/M/Punjab
(28/M/Punjab)   
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   Dreamypretty and Khoi
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