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Nov 16
ज़िन्दगी, वक़्त की एक सीडी बन के रहे गई
10/17/2015

ज़िन्दगी, वक़्त की एक सीडी बन के रहे गई, ज़िन्दगी, वक़्त की एक सीडी बन के रहे गई,
पीछे मुड़ के देखा तो, पीछे मुड़ के देखा तो एक अन्धेरी सुरनग बन के रहे गइ,
ज़िन्दगी, वक़्त की एक सीडी बन के रहे गई,

सोचूँ, अभ में सोचूँ, आगे कहा तक चलना है, सोचूँ, अभ में सोचूँ आगे और क्या क्या करना है
वक़्त एक एसी जनजीर है, वक़्त एक एसी जनजीर है जिसकी कड़ीया गिनना मुमकिन नहीं,
ज़िन्दगी, वक़्त की एक सीडी बन के रहे गई,

बचपना अभ याद नहीं जिसमें खेले थे और पले थे, जवानी वो भूल गए जिसमें सीखे थे और बड़े हुए,
वक़्त एक एसी दलदल है, वक़्त एक एसी दलदल है जिसकी खाई से निकलना मुमकिन नहीं
ज़िन्दगी, वक़्त की एक सीडी बन के रहे गई,

इस सुरनग के अन्धेरे से कैसे निकला जाए, आगे भी तो कोई रोशनी नहीं दिखाई दे रही
वक़्त की परछाईं में ज़िन्दगी गुज़र गई, भुडापा नहीं, अबतो किसी और का इन्तज़ार है
ज़िन्दगी, वक़्त की एक सीडी बन के रहे गई, ज़िन्दगी, वक़्त की एक सीडी बन के रहे गई
Written by
Suresh Gupta
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