डर हैं लगता
खुशीया जो मिली
खो ना दू उसे कही
मुठठी मे बंद किये थे
जो रीशतो कि दोरीया
छूट ना जाए हाथों से वो कही
कही खुशीये और रीशतो को समभालने की कोशिशे मे
हार ना जाऊ मे कही
Jul 15, 2021
Jul 15, 2021 at 10:00 AM UTC
डर हैं लगता
खुशीया जो मिली
खो ना दू उसे कही
मुठठी मे बंद किये थे
जो रीशतो कि दोरीया
छूट ना जाए हाथों से वो कही
कही खुशीये और रीशतो को समभालने की कोशिशे मे
हार ना जाऊ मे कही
