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डर हैं लगता खुशीया जो मिली खो ना दू उसे कही मुठठी मे बंद किये थे जो रीशतो कि दोरीया छूट ना जाए हाथों से वो कही कही खुशीये और रीशतो को समभालने की कोशिशे मे हार ना जाऊ मे कही
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Jul 15, 2021
Jul 15, 2021 at 10:00 AM UTC
रीशतो की कशमकश
डर हैं लगता खुशीया जो मिली खो ना दू उसे कही मुठठी मे बंद किये थे जो रीशतो कि दोरीया छूट ना जाए हाथों से वो कही कही खुशीये और रीशतो को समभालने की कोशिशे मे हार ना जाऊ मे कही
akta-agarwal
Written by
25/F/Kolkata
Jul 15, 2021
Jul 15, 2021 at 10:00 AM UTC
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