Hello Poetry
Submit your work and get some sparkles! Create free account
=== Back का सिलसिला === Back का सिलसिला संग चलने लगा         ऐसा सोचा न था !! ईस्क है पाने खोने का एक सिलसिला ऐसा सोचा न था !! pass वो हो गई Back मुझ को मिला !! ऐसा सोचा न था !! notes मै ने लिखा पर पढी यार वो ऐसा सोचा न था !! प्यार मे मुझ को कैसा दगा मिल गया !! ऐसा सोचा न था !! जब थी नजरे मिली Back एक मे लगा जब मिले तो दो – दस, Back ढोना पडा !! ऐसा सोचा न था !! अब तो छे Back है हर semester मिले ऐसा सोचा न था !! हम भी बेसर्म सा मुस्कूराने लगे !! बात घर तक गई तो ये दंगा हुआ मम्मी का प्यारा बेटा लफन्गा हुआ !! दादी की गालिया तो कहर बन पडी मेरी ध्यान फिर भी थी उन पे अडी !! Back लगता था तब अब तो ree लग रहा ऐसा सोचा न था !! फिर मेरी हौसलो कि हवा खुल गई !! pass वो हो गई fail मै हो गया !! Back का सिलसिला संग चलने लगा ऐसा सोचा न था !! सुरज कुमर सिहँ दिनांक :-  17-03-2015
0
Mar 19, 2015
Mar 19, 2015 at 10:45 AM UTC
Back का सिलसिला hindi poem
=== Back का सिलसिला === Back का सिलसिला संग चलने लगा         ऐसा सोचा न था !! ईस्क है पाने खोने का एक सिलसिला ऐसा सोचा न था !! pass वो हो गई Back मुझ को मिला !! ऐसा सोचा न था !! notes मै ने लिखा पर पढी यार वो ऐसा सोचा न था !! प्यार मे मुझ को कैसा दगा मिल गया !! ऐसा सोचा न था !! जब थी नजरे मिली Back एक मे लगा जब मिले तो दो – दस, Back ढोना पडा !! ऐसा सोचा न था !! अब तो छे Back है हर semester मिले ऐसा सोचा न था !! हम भी बेसर्म सा मुस्कूराने लगे !! बात घर तक गई तो ये दंगा हुआ मम्मी का प्यारा बेटा लफन्गा हुआ !! दादी की गालिया तो कहर बन पडी मेरी ध्यान फिर भी थी उन पे अडी !! Back लगता था तब अब तो ree लग रहा ऐसा सोचा न था !! फिर मेरी हौसलो कि हवा खुल गई !! pass वो हो गई fail मै हो गया !! Back का सिलसिला संग चलने लगा ऐसा सोचा न था !! सुरज कुमर सिहँ दिनांक :-  17-03-2015
hindi poem on back paper
suraj-kumar-singh
Written by
Mar 19, 2015
Mar 19, 2015 at 10:45 AM UTC
Request permission to use this poem