वो तुम्हीं हो परी
रात फिर ख्वाब मे
एक हसीना मिली
दिख रही नूर सी
हर कली से भली
खो गई फिर कहाँ
है मुझे क्या पता
होठ अंगुर से
आँख है फुलझडी
वो तुम्ही हो परी
वो तुम्ही हो परी
आँख मे है नशा
हर अदा मे मजा
मै तो सोया रहा
तुझ्मे खोया रहा
रात थी ख्वाब मे
जो हसीना मिली
वो तुम्ही हो परी
वो तुम्ही हो परी ॥
सूरज कुमार सिहँ
दिनांक – 24 – 07 - 2015
Jul 29, 2015
Jul 29, 2015 at 1:50 AM UTC
वो तुम्हीं हो परी
रात फिर ख्वाब मे
एक हसीना मिली
दिख रही नूर सी
हर कली से भली
खो गई फिर कहाँ
है मुझे क्या पता
होठ अंगुर से
आँख है फुलझडी
वो तुम्ही हो परी
वो तुम्ही हो परी
आँख मे है नशा
हर अदा मे मजा
मै तो सोया रहा
तुझ्मे खोया रहा
रात थी ख्वाब मे
जो हसीना मिली
वो तुम्ही हो परी
वो तुम्ही हो परी ॥
सूरज कुमार सिहँ
दिनांक – 24 – 07 - 2015
