गुमान न कर अपनी इस अदाकारी पर
क्षण मात्र में धज्जियां उड़ा दी जाएगी
खेल खेल,खेलना तो तेरा काम रहा है
हर एक झूठ में तेरा नाम रहा है
उछाल जितना उछाल सके
ये मत सोच की उछाल कर कीचड़ मुझपर
तू बच जाए, तू कब गुमनाम रहा है
मै तो बचता ही आया हु सदैव
और आगे भी बच ही जाऊंगा
पर भ्रम तू भी न पाल मन में_
एक खौफनाक अध्याय तेरी किताब में भी रच जाऊंगा
बस कुछ धीर जो मन में जन्म लेने को आतुर
पर तेरी उन रचित साजिशों का मंजर
इस धीर को भी घोंट जाता है
मै चाहता हु इसे भी बचाना
पर तेरा हर एक बार याद आ ही जाता है
कायर तो तू है, इसमें कोई झूठ नहीं
लड़ मुझसे सामने से बहम तेरा भी तोड़ दिया जाए
तेरा हर एक मरहम तुझे बापिस मोड दिया जाए
कुछ तो विकसित अपनी इस सोच को कर
कब तक जिएगा तू झूठ से भी लिपटकर
असत्य की ढाल से तू थोड़ा तो निकल
फिर देख तू ही क्या तेरी रूह भी होगी विकल
मत कर उम्मीद उन झूठी सफलताओं की
जो तुझको मिलती नजर आया करती है
ये सिर्फ मारा करती है, खुद कभी न मरती है
By Mr नितिन कुमार मीना मोहचा
Dec 4, 2025
Dec 4, 2025 at 11:43 PM UTC
गुमान न कर अपनी इस अदाकारी पर
क्षण मात्र में धज्जियां उड़ा दी जाएगी
खेल खेल,खेलना तो तेरा काम रहा है
हर एक झूठ में तेरा नाम रहा है
उछाल जितना उछाल सके
ये मत सोच की उछाल कर कीचड़ मुझपर
तू बच जाए, तू कब गुमनाम रहा है
मै तो बचता ही आया हु सदैव
और आगे भी बच ही जाऊंगा
पर भ्रम तू भी न पाल मन में_
एक खौफनाक अध्याय तेरी किताब में भी रच जाऊंगा
बस कुछ धीर जो मन में जन्म लेने को आतुर
पर तेरी उन रचित साजिशों का मंजर
इस धीर को भी घोंट जाता है
मै चाहता हु इसे भी बचाना
पर तेरा हर एक बार याद आ ही जाता है
कायर तो तू है, इसमें कोई झूठ नहीं
लड़ मुझसे सामने से बहम तेरा भी तोड़ दिया जाए
तेरा हर एक मरहम तुझे बापिस मोड दिया जाए
कुछ तो विकसित अपनी इस सोच को कर
कब तक जिएगा तू झूठ से भी लिपटकर
असत्य की ढाल से तू थोड़ा तो निकल
फिर देख तू ही क्या तेरी रूह भी होगी विकल
मत कर उम्मीद उन झूठी सफलताओं की
जो तुझको मिलती नजर आया करती है
ये सिर्फ मारा करती है, खुद कभी न मरती है
By Mr नितिन कुमार मीना मोहचा
मै तो बचता ही आया हु सदैव
और आगे भी बच ही जाऊंगा
पर भ्रम तू भी न पाल मन में_
एक खौफनाक अध्याय तेरी किताब में भी रच जाऊंगा
