सुलाए जो अरमान थे मैने अपने,
जगाया ही क्यों?
इच्छा थी यह तुम्हारी.
फिर नज़र लगाया ही क्यों?
Apr 22, 2014
Apr 22, 2014 at 4:03 AM UTC
सुलाए जो अरमान थे मैने अपने,
जगाया ही क्यों?
इच्छा थी यह तुम्हारी.
फिर नज़र लगाया ही क्यों?
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