अपने सुकून की तलबगार हूँ मै
अपने ही नूर में मशरूफ़ हूँ मै
आज किसी की ज़ुस्तजू नही हैं
कोई ख्वाब की ताबीर नही हैं
अपने से ही अपनी क़ुरबत हैं
इसीलिए जरा जरा
आये हुए वक़्त में खुशियां ढूंढती हु में.......
Jun 24, 2018
Jun 24, 2018 at 10:16 AM UTC
अपने सुकून की तलबगार हूँ मै
अपने ही नूर में मशरूफ़ हूँ मै
आज किसी की ज़ुस्तजू नही हैं
कोई ख्वाब की ताबीर नही हैं
अपने से ही अपनी क़ुरबत हैं
इसीलिए जरा जरा
आये हुए वक़्त में खुशियां ढूंढती हु में.......