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बोहोत कुछ सीखा है मैने, कुछ ज़िन्दगी है, मजबूरियां है । उसने गिराया, चलाया, भगाया, रुलाया, और हम सीखते चले गए । ज़िंदगी के कई मोड़ पर, खुद को अकेले भी पाया । भीड़ में भी अपनेपन का एहसास, कोई ना करवा पाया । दर्द देखा, सेह लिया । बुरा लगा, संभाल लिया । को कितना साथ है, देख लिया । सच क्या है, मान लिया । मुश्किले है, सुलझाने का प्रण लिया । हार मानने से भी इंकार किया । बोहोत सिखाया मुझे ज़िन्दगी ने, बोहोत गिराया है, इसलिए बोहोत कुछ सीख लिया है मैने खुड्से ही । सीखना पड़ा ही, मजबूरियां थी । हार मानने का भी कभी इरादा नहीं, क्यूंकि घर बैठी उस मां के इच्छाओं पर सवाल आया है । "कुछ कर दिखाना है सबको", ऐसा नहीं सोचते अब । क्यूंकि काफी कुछ करते आए है, आजतक किसने साथ निभाया है ? दिखावे में अब हम मानते नहीं, ना, वोह नहीं गवाया है । जो भी दिखाना है, खुदको दिखाना है । जंग अब खुदसे है, और आइने में खड़े उस इंसान को गर्व महसूस करवाना है ।
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May 15, 2020
May 15, 2020 at 6:10 AM UTC
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बोहोत कुछ सीखा है मैने, कुछ ज़िन्दगी है, मजबूरियां है । उसने गिराया, चलाया, भगाया, रुलाया, और हम सीखते चले गए । ज़िंदगी के कई मोड़ पर, खुद को अकेले भी पाया । भीड़ में भी अपनेपन का एहसास, कोई ना करवा पाया । दर्द देखा, सेह लिया । बुरा लगा, संभाल लिया । को कितना साथ है, देख लिया । सच क्या है, मान लिया । मुश्किले है, सुलझाने का प्रण लिया । हार मानने से भी इंकार किया । बोहोत सिखाया मुझे ज़िन्दगी ने, बोहोत गिराया है, इसलिए बोहोत कुछ सीख लिया है मैने खुड्से ही । सीखना पड़ा ही, मजबूरियां थी । हार मानने का भी कभी इरादा नहीं, क्यूंकि घर बैठी उस मां के इच्छाओं पर सवाल आया है । "कुछ कर दिखाना है सबको", ऐसा नहीं सोचते अब । क्यूंकि काफी कुछ करते आए है, आजतक किसने साथ निभाया है ? दिखावे में अब हम मानते नहीं, ना, वोह नहीं गवाया है । जो भी दिखाना है, खुदको दिखाना है । जंग अब खुदसे है, और आइने में खड़े उस इंसान को गर्व महसूस करवाना है ।
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May 15, 2020
May 15, 2020 at 6:10 AM UTC
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