एक बात का सुकून तो है मुझे,
मैंने किसी को कैद नहीं किया।
जो चले गए अपनी मर्जी से,
उनके लिए खेद नहीं किया।
मलाल बस इतना सा रह गया दिल में,
वो क्यों छुपे रहे इस बुझदिली में।
मैं क्यों अंकुश लगाऊ किसी के जीवन पर,
मेरा कोई हक नहीं
किसी के जीवन की वीरानगी का।
अब वक्त था मेरा भी
फिर से उन राहों से रवानगी का।
कसम मां समान गंगा जल की,
मुझे जरूरत ही महसूस नहीं
किसी छल की।
बस मेरे हृदय पर वो घाव,
जो देन तुम्हारी थी।
कुछ भरोसा हमारा भी,
बस ये गलती हमारी थी।
बस खुद पर
एक अटूट विश्वास मेरा है,
देखना तुम भी
भविष्य की चाल को।
तेरे जीवन में सिर्फ
घनघोर अंधेरा है,
जो किसी और का नहीं
सिर्फ तेरा है।
मैं खुद मांगूंगा
उस परमात्मा से दुआ तुम्हारे लिए,
भूलकर उन सब अजाबों को
जो तुमने मुझे दिए।
कुछ रिक्त स्थान
हम भी अपने हृदय में रखते हैं,
अब बस चलते ही रहते हैं,
अब कहाँ थकते हैं।
आज सब कुछ पा चुका मैं
उस परमात्मा की रहमत से,
अब सिर्फ मेरा वजूद ही
उसकी बनाई कुदरत से।
बस मेरे साथ
कभी छल नहीं हुआ होता,
तो आज मैंने
अपनी निश्चलता को
नहीं खोया होता।
मैं तो झेल गया
इन तुम्हारे अजाबों को,
और आज भी
जीवित ही हूँ—
ढककर
अपने कोमल घावों को।
आज मेरा निशीथ
मेरे साथ इतना है कि,
जो भी मांगता हूँ
इसको साक्षी रखकर,
वो मिल ही जाता है मुझे।
और जो सोचता हूँ,
सत्य हो जाता है।
मैं नहीं मांगना चाहता
तुम्हारी बर्बादी
उस काल से,
इसलिए मैं याद ही नहीं करना चाहता तुम्हें
उस निशीथ काल में।
आज मैं खुद
बचकर निकलना चाहता हूँ
उन काली यादों से।
अब मैं वैसे भी
बहुत दूर हूँ
उन झूठी फरियादों से।
अब मैं टकराना ही नहीं चाहता
उन शतरंज के प्यादों से,
जिनको लोग इंसान कहते हैं—
कुछ उन अपवादों से।
Jan 6
Jan 6, 2026 at 2:04 AM UTC
एक बात का सुकून तो है मुझे,
मैंने किसी को कैद नहीं किया।
जो चले गए अपनी मर्जी से,
उनके लिए खेद नहीं किया।
मलाल बस इतना सा रह गया दिल में,
वो क्यों छुपे रहे इस बुझदिली में।
मैं क्यों अंकुश लगाऊ किसी के जीवन पर,
मेरा कोई हक नहीं
किसी के जीवन की वीरानगी का।
अब वक्त था मेरा भी
फिर से उन राहों से रवानगी का।
कसम मां समान गंगा जल की,
मुझे जरूरत ही महसूस नहीं
किसी छल की।
बस मेरे हृदय पर वो घाव,
जो देन तुम्हारी थी।
कुछ भरोसा हमारा भी,
बस ये गलती हमारी थी।
बस खुद पर
एक अटूट विश्वास मेरा है,
देखना तुम भी
भविष्य की चाल को।
तेरे जीवन में सिर्फ
घनघोर अंधेरा है,
जो किसी और का नहीं
सिर्फ तेरा है।
मैं खुद मांगूंगा
उस परमात्मा से दुआ तुम्हारे लिए,
भूलकर उन सब अजाबों को
जो तुमने मुझे दिए।
कुछ रिक्त स्थान
हम भी अपने हृदय में रखते हैं,
अब बस चलते ही रहते हैं,
अब कहाँ थकते हैं।
आज सब कुछ पा चुका मैं
उस परमात्मा की रहमत से,
अब सिर्फ मेरा वजूद ही
उसकी बनाई कुदरत से।
बस मेरे साथ
कभी छल नहीं हुआ होता,
तो आज मैंने
अपनी निश्चलता को
नहीं खोया होता।
मैं तो झेल गया
इन तुम्हारे अजाबों को,
और आज भी
जीवित ही हूँ—
ढककर
अपने कोमल घावों को।
आज मेरा निशीथ
मेरे साथ इतना है कि,
जो भी मांगता हूँ
इसको साक्षी रखकर,
वो मिल ही जाता है मुझे।
और जो सोचता हूँ,
सत्य हो जाता है।
मैं नहीं मांगना चाहता
तुम्हारी बर्बादी
उस काल से,
इसलिए मैं याद ही नहीं करना चाहता तुम्हें
उस निशीथ काल में।
आज मैं खुद
बचकर निकलना चाहता हूँ
उन काली यादों से।
अब मैं वैसे भी
बहुत दूर हूँ
उन झूठी फरियादों से।
अब मैं टकराना ही नहीं चाहता
उन शतरंज के प्यादों से,
जिनको लोग इंसान कहते हैं—
कुछ उन अपवादों से।
आज मेरा निशीथ
मेरे साथ इतना है कि,
जो भी मांगता हूँ
इसको साक्षी रखकर,
वो मिल ही जाता है मुझे।
और जो सोचता हूँ,
सत्य हो जाता है।
मैं नहीं मांगना चाहता
तुम्हारी बर्बादी
उस काल से,
इसलिए मैं याद ही नहीं करना चाहता तुम्हें
उस निशीथ काल में।
