Hello Poetry
Submit your work and get some sparkles! Create free account
जाऊ तो कन्हा जाऊ दर्द के सागर में डूबा समां देखू चाहे जिस ओर लगे है कोई मन का चोर हर तरफ लालच चाहत कुछ पाने की स्वार्थ के सागर में डूबा समां जाऊ तो कन्हा जाऊ ............. न जाने लगी किसकी नजर सब है यंहा बेखबर धर्म के नाम पे लरते सब यंहा ना जाने इंसा खोया कन्हा जाऊ तो कन्हा जाऊ ............. सोचु लौटु अपनो के बीच फिर सोचु पराये है सब यंहा कौन अपना कौन पराया की लराई क्यों क्यों लर रहे सब यंहा जाऊ तो कन्हा जाऊ ............. आज एक बाप हवस का भूखा बेटी की इज्जत लुटे यंहा हर तरफ है बेहसी चेहरा इज्जत लुटे यंहा वंहा जाऊ तो कन्हा जाऊ ............. हर तरफ एक माँ की बेटी हर रात डर-डर के सोती ना जाने कब कौन लुटे कन्हा सोचु कौन अपना,सोचु कौन अपना जाऊ तो कन्हा जाऊ .......... *********मन************
0
Apr 19, 2013
Apr 19, 2013 at 1:02 AM UTC
जाऊ तो कन्हा जाऊ
जाऊ तो कन्हा जाऊ दर्द के सागर में डूबा समां देखू चाहे जिस ओर लगे है कोई मन का चोर हर तरफ लालच चाहत कुछ पाने की स्वार्थ के सागर में डूबा समां जाऊ तो कन्हा जाऊ ............. न जाने लगी किसकी नजर सब है यंहा बेखबर धर्म के नाम पे लरते सब यंहा ना जाने इंसा खोया कन्हा जाऊ तो कन्हा जाऊ ............. सोचु लौटु अपनो के बीच फिर सोचु पराये है सब यंहा कौन अपना कौन पराया की लराई क्यों क्यों लर रहे सब यंहा जाऊ तो कन्हा जाऊ ............. आज एक बाप हवस का भूखा बेटी की इज्जत लुटे यंहा हर तरफ है बेहसी चेहरा इज्जत लुटे यंहा वंहा जाऊ तो कन्हा जाऊ ............. हर तरफ एक माँ की बेटी हर रात डर-डर के सोती ना जाने कब कौन लुटे कन्हा सोचु कौन अपना,सोचु कौन अपना जाऊ तो कन्हा जाऊ .......... *********मन************
mann-choudhary
Written by
Apr 19, 2013
Apr 19, 2013 at 1:02 AM UTC
Request permission to use this poem