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जहां की मिट्टी में भी महक हुआ करती थी सुबह में पक्षियों की चहक हुआ करती थी भंवरे गुंजन करते थे,रातों में जुगनू क्रीड़ा करते थे जहां खेतों के भी नाम हुआ करते थे, पशुओं की पूजा होती थी,, जहां बुजुर्गों का सम्मान हुआ करता था, कुएं को कोठी कहते थे, जिसमें रहट चला करते थे ये हम सुना करते हैं,, बैलों की जोड़ी होती थी, वदियां जो कहलाती थीं जो मिलकर हल चलाती थी,, मिल जुलकर सारे रहते थे,,, वो भी कोई वक्त रहा होगा || हमने तो देखा नहीं, तुमने भी सिर्फ सुना होगा || एक कहानी सी लगती हैं, दिल खुश कर जाती हैं, सोचो जरा सा तुम जिसने ये पल जिया होगा, वो भी कोई वक्त रहा होगा || बया घास के महल बनाती थी, एक एक तिनका बुना करती थीं,, अब वो नजर न आती है,, ऐसा क्या हुआ होगा,, वो भी कोई वक्त रहा होगा || वो दौर ही मेहनत कश का था,, न तेरा न मेरे वश का था,, जो भी घर में बनता था, बड़े चाव से खाया जाता था अपमान अन्न का हुआ न करता था देख कोई भोजन ये मुंह जो तुम बनाते हो, कभी सोचा है ये उस वक्त किसी को मिला भी होगा। वो भी कोई वक्त रहा होगा || सुकून, चैन तो था उस वक्त, पर संघर्ष भी कम न रहा होगा, वो भी कोई वक्त रहा होगा! || वो भी कोई वक्त रहा होगा || By_Mr.नितिन कुमार मीना ✍🏻 ✍🏻 Belong to the great village mohacha
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Nov 3, 2025
Nov 3, 2025 at 5:52 AM UTC
|| वो भी कोई वक्त रहा होगा || (झलक गांव की)
जहां की मिट्टी में भी महक हुआ करती थी सुबह में पक्षियों की चहक हुआ करती थी भंवरे गुंजन करते थे,रातों में जुगनू क्रीड़ा करते थे जहां खेतों के भी नाम हुआ करते थे, पशुओं की पूजा होती थी,, जहां बुजुर्गों का सम्मान हुआ करता था, कुएं को कोठी कहते थे, जिसमें रहट चला करते थे ये हम सुना करते हैं,, बैलों की जोड़ी होती थी, वदियां जो कहलाती थीं जो मिलकर हल चलाती थी,, मिल जुलकर सारे रहते थे,,, वो भी कोई वक्त रहा होगा || हमने तो देखा नहीं, तुमने भी सिर्फ सुना होगा || एक कहानी सी लगती हैं, दिल खुश कर जाती हैं, सोचो जरा सा तुम जिसने ये पल जिया होगा, वो भी कोई वक्त रहा होगा || बया घास के महल बनाती थी, एक एक तिनका बुना करती थीं,, अब वो नजर न आती है,, ऐसा क्या हुआ होगा,, वो भी कोई वक्त रहा होगा || वो दौर ही मेहनत कश का था,, न तेरा न मेरे वश का था,, जो भी घर में बनता था, बड़े चाव से खाया जाता था अपमान अन्न का हुआ न करता था देख कोई भोजन ये मुंह जो तुम बनाते हो, कभी सोचा है ये उस वक्त किसी को मिला भी होगा। वो भी कोई वक्त रहा होगा || सुकून, चैन तो था उस वक्त, पर संघर्ष भी कम न रहा होगा, वो भी कोई वक्त रहा होगा! || वो भी कोई वक्त रहा होगा || By_Mr.नितिन कुमार मीना ✍🏻 ✍🏻 Belong to the great village mohacha
बया घास के महल बनाती थी, एक एक तिनका बुना करती थीं,, अब वो नजर न आती है,, ऐसा क्या हुआ होगा,, वो भी कोई वक्त रहा होगा || वो दौर ही मेहनत कश का था,, न तेरा न मेरे वश का था,,
MrNitinKumarmeena
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Nov 3, 2025
Nov 3, 2025 at 5:52 AM UTC
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