न बांधो
न दिशा दो
बस थोड़ा प्रकाश दो
और उड़ने को आकाश दो
कोई रहस्य नहीं, एक बेल हूँ मैं
तुम पर अवलंबित हूँ पर अमरबेल नहीं
बढ़ रही हूँ तुम्हारे संग
गुँथ गयी हूँ तुम्हारे अंग
अंत तक के लिये....
न बांधो
न दिशा दो
बस थोड़ा प्रकाश दो
और उड़ने को आकाश दो
कोई रहस्य नहीं, एक बेल हूँ मैं
तुम पर अवलंबित हूँ पर अमरबेल नहीं
बढ़ रही हूँ तुम्हारे संग
गुँथ गयी हूँ तुम्हारे अंग
अंत तक के लिये....