अंधेरा कितना भी रहे, भोर होना तो तय है।
ये जो तुम अपने हक के लिए लड़ न सके,
कुछ और नहीं तुम्हारा भय है।।
तुम कल भी कुछ नहीं कर पाए,
और आज भी कुछ न करो , फिर भी
भोर होना तो तय है ||
By_Mr.Nit________✍🏻 ✍🏻
Nov 3, 2025
Nov 3, 2025 at 5:58 AM UTC
अंधेरा कितना भी रहे, भोर होना तो तय है।
ये जो तुम अपने हक के लिए लड़ न सके,
कुछ और नहीं तुम्हारा भय है।।
तुम कल भी कुछ नहीं कर पाए,
और आज भी कुछ न करो , फिर भी
भोर होना तो तय है ||
By_Mr.Nit________✍🏻 ✍🏻
तुम कल भी कुछ नहीं कर पाए,
और आज भी कुछ न करो , फिर भी
भोर होना तो तय है ||
